Cyber Thagi

साईबर ठगों का आतंक | Cyber Thagi

साईबर ठगों का आतंक

( Cyber thagon ka aatank ) 

 

आज बढ़ रहा है तीव्रता से साईबर ठगों का आतंक,
अपने-आपको समझ रहें है वह सभी से बड़े दबंग।
फैला रहें है जो जाल धनाधन ऐसे अनेकों है शैतान,
जाल झूठ छल-कपट हेरा फेरी से कर देते है दंग।।

करते है मोबाइल सिम बदलकर वो फोन से ये बात,
फोन मिलाकर कहते मित्रवर क्या है आपका हाल।
वाइस ऐप से निकाल लेते जो हु-ब-हु वैसी आवाज़,
पूछते-पूछते हालचाल वो करने लग जाते सवाल।।

कैसे कहाॅं हो आजकल थोड़ा करना यार मेरी मदद,
रूपयों की हमें है सख्त ज़रूरत मना करना तू मत।
रिश्तेदार बनकर भी कहते एक्सीडेन्ट का लेते नाम,
फॅंसा लेते है वें जाल में फोन-पे कर दो इसी वक्त।।

यही नही है आज हो रहा हेलो हाय फोन पर चैटिंग,
लड़की बनकर ये बात करेंगी करलो हम से सैटिंग।
विडियो काल से BF मूवी बनाकर करतें है परेशान,
वायरल करने का कहकर ये पैसों की करते माॅंग।।

कोई नही हड़बड़ाना दोस्तों इनके झांसे में ना आना,
होते है वो तेज-तर्राट पहले सब तहकीकात करना।
नही बताना कभी बैंक डिटेल ना पासवर्ड ये बताना,
मेरा काम है रचनाएं लिखना ठीक लगे वो करना।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

Similar Posts

  • किताब | Kitab

    किताब ( Kitab )    पन्ने फड़फड़ाते रहे और हम लिखते रहे किताब जिंदगी की मगर,सियाही ही खत्म सी होने लगी कलम की किताब भी रह गई अधूरी की अधूरी ही शब्दों के मायने बदलते गए बदलते हुए अपनों की तरह बह गईं किश्तियां भी उम्मीदों की रह गए निखालिस टूटते हुए सपनों की तरह…

  • संसय | Kavita

    संसय ( Sansay )   मन को बाँध दो दाता मेरे,मेरा मन चंचल हो जाता है। ज्ञान ध्यान से भटक रहा मन,मोह जाल मे फंस जाता है।   साध्य असाध्य हो रहा ऐसे, मुझे प्रेम विवश कर देता है। बचना चाहूं मैं माया से पर, वो मुझे खींच के ले जाता है।   वश में…

  • बचकर रहना | Bachkar Rahana

    बचकर रहना ( Bachkar rahana )   फ़िज़ा की हवाओं में जहर है घुला हुआ सांस भी लेना तो संभलकर फिसलन भरे हैं रास्ते कदम भी रखना तो संभलकर नीयत मे इंसानियत है मरी हुयी जबान पर शराफत है मगर मुश्किल है किसी पर यकीन करना चाहते हो यदि बचकर रहना, तब रिश्ते में बंधना…

  • पहली बारिश | Kavita

    पहली बारिश   ( Pehli Baarish )   बचपन की यादों को समेट रही हूं पहली बारिश की यादे सहेज रही हूं बारिश का पानी सखी सहेली कागज की नाव छपाक सी मस्ती बेफिक्र ज़माना वक्त सुहाना हौले हौले से सपने भीग जाना पिता की मुस्कान मां को चिंता पहली बारिश का अहसास अनोखा ना…

  • किसानों की उम्मीद | Poem in Hindi on Kisan

    किसानों की उम्मीद  ( Kisano ki umeed )    प्रीति में चूक ना इनके अब, उम्मीद का दीप जले कब तक जीवन बरसे तरसे जीवन, नभ में ना मेघ घटे अब तक हे नाथ अनाथ करहु ना अब, जीवन तो शेष रहे जब तक जल ही जल है जल थल नभ में, हम फिर भी…

  • भोर की नव बेला || Kavita

    भोर की नव बेला ( Bhor ki naw bela )   मैं करोना को हराकर बाहर आई हूँ खुद की बहादुरीपर थोडा इतराई हूँ मालूम था सफर बहुत कठिन है फिर भी हिम्मत खूब मन में जुटाई है   खूब पिया पानी खूब भाप भी ली खूब प्राणायाम की लगाई झडी लम्बी साँसे छत पर…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *