दीप जलाने होंगे

दीप जलाने होंगे | Kavita

दीप जलाने होंगे

( Deep jalane honge )

 

दीप  जलाने  होंगे  जोत जलानी होगी
शारदे दरबार तेरे अलख जगानी होगी

 

सिर पर रख दो हाथ मां भर दो भंडार मां
शब्द सुमनहार मैया कर लो स्वीकार मां

 

वीणा वरदायिनी मोहक सुभाषिनी
बुद्धि विधाता वाणी मां प्रज्ञादायिनी

 

लेखनी में भाव भर शब्द शब्द रस भर दो
आराधक शरण तेरी काव्य सरस कर दो

 

गीत गजल महके मां बरसाओ कृपा शारदे
साधना  सफल  कर माता लेखनी संवार दे

 

ध्यान  भी  तेरा  माता शरण भी तेरी मां
वरदान से झोली आकर भर दो मेरी मां

 

छंद गीत मुक्तक सब शोभित मां दरबार में
गीतों  में  संगीत  भर  दो गाता रहूं संसार में

?

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

महारानी लक्ष्मी बाई | Maharani Laxmi Bai Par Kavita

Similar Posts

  • प्रेमसिंह सोलंकी जी

    प्रेमसिंह सोलंकी जी ( स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व पूर्व विधायक ) हमारे आदर्श आदरणीय श्री प्रेमसिंह सोलंकी जी,जनता के बीच में जन _जन के नायक थे।समाज सेवी और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी,राजनीति के धुरंधर विधायक थे।। तारीख 15 जुलाई सन 1913 को स्थानपटेल फलिया, समोई, मध्यप्रदेश मेंपिता श्री बापुजी सोलंकी.जीबालक बन कर जन्म लिए घर परिवार…

  • बदलने से | Badalne se

    बदलने से हमको परहेज़ है साहब कहाँ बदलने से।कुछ न बदलेगा मगर बस यहाँ बदलने से। बात कोई नहींं करता वहाँ बदलने कीहम बदल सकते हैं सचमुच जहाँ बदलने से। न दिल, न जज़्बा, न लहजा, न नज़रिया, न नज़रकुछ बदलता नहीं है चेहरा बदलने से। सर झुकाने के तरीके के सिवा क्या बदलादिल बदलता…

  • एक से दस तक गिनती | Poem baccho ke liye

     एक से दस तक गिनती ( Ek se das tak ginti )   एक बड़े राजा का बेटा, दो दिन से मुर्दा सा लेटा।   तीन महात्मा सुन कर आए, चार दवा के वे टुकड़े लाए।   पांच मिनिट घिस गर्म कराई छः छः घंटे बाद दवा पिलाई।   सातवे दिन कुछ नैना खोले, आठवें…

  • महिला दिवस – दिकु का सम्मान

    महिला दिवस – दिकु का सम्मान दिकु, तुम केवल नाम नहीं, एक पहचान हो,संघर्ष की राहों में जलती हुई एक मशाल हो।हर कठिनाई को हँसकर अपनाने वाली,त्याग और तप की सजीव मिसाल हो। हर दर्द सहकर भी मुस्कुराने वाली,सपनों को हकीकत में सजाने वाली।अपनी मेहनत से जो लिखे नई कहानी,नारीत्व की सच्ची और सुंदर निशानी।…

  • रामकेश एम. यादव की कविताएं | Ramkesh M. Yadav Hindi Poetry

    प्रेमिका क्या हुआ है इनको मुझे चाहने लगे हैं,मेरा मयकशी बदन ये निहारने लगे हैं। प्रेमी:-ख़ाक होने से मुझको बचा लीजिए……….. खता मेरी क्या है, बता दीजिये,नजर लड़ गई है, सजा दीजिये।खता मेरी क्या है, बता दीजिये……… धड़कती हो सीने में मैं क्या करूँ,छलकती हो दिल में, मैं क्या करूँ।आँखों से तीर ये, चला दीजिये,नजर…

  • रखें इस पर्यावरण का ध्यान | Paryavaran ka Dhyan

    रखें इस पर्यावरण का ध्यान ( Rakhen is paryavaran ka dhyan )   चाहें पेड़-पौधे, जीव-जन्तु अथवा हो कोई इंसान, इस प्रकृति से हम है और हमसे ही इसकी शान। साफ़-स्वच्छ इसको रखो इससे जीवन खुशहाल, इसके प्रदूषण से जाती देश में हजारों की जान।। आओ मिलकर सब रखें इस पर्यावरण का ध्यान, पेड़ पौधे…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *