जगमग जगमग दीप जले है

दीप जलते ही | Deep Jalate Hi

दीप जलते ही

( Deep Jalate Hi )

छुप के बैठी थी कहीं शातिर हवा।
दीप जलते ही, हुई हाज़िर हवा।

तर्के-मय वाले परेशानी में हैं,
बू-ए-मय अब मत उड़ा काफ़िर हवा।

यक-ब-यक गुमसुम नदी क्यों हँस पड़ी,
मौज से क्या कह गई आख़िर, हवा।

क्या ठिकाना कब, कहाँ को चल पड़े,
रुख़ बदलने में तो है माहिर हवा।

छुप के रह सकती नहीं कोई महक,
पल में कर देती है, जग-ज़ाहिर हवा।

मैक़दे तक आख़िरश आ ही गई,
घूम फिर कर मस्जिदो-मंदिर, हवा।

ऐ ‘अकेला’ रात यूँ ही कट गई,
अपना दुख करती रही ज़ाहिर हवा।

कवि व शायर: वीरेन्द्र खरे ‘अकेला

छतरपुर ( मध्य प्रदेश )

तर्के-मय=शराब का परित्याग
बू-ए-मय=शराब की गन्ध
यक-ब-यक=अचानक, एकाएक

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • हमको कभी

    हमको कभी हमको कभी ख़ुशियों का भी मंज़र नहीं मिलतादिल को मिले सुकूँ वो मुकद्दर नहीं मिलता शिद्दत से जो चाहे वही दिलबर नहीं मिलताजो ज़ख़्म मेरे सी दे रफ़ूगर नहीं मिलता रहने को ग़रीबों को कभी घर नहीं मिलतादे दे उन्हें जो छाँव वो छप्पर नहीं मिलता जो राह दिखाते थे सदा ज़ीस्त में…

  • ग़ज़ल गुनगुना दीजिए

    ग़ज़ल गुनगुना दीजिए साज़े-दिल पर ग़ज़ल गुनगुना दीजिएशामे-ग़म का धुँधलका हटा दीजिए ग़म के सागर में डूबे न दिल का जहाँनाख़ुदा कश्ती साहिल पे ला दीजिए एक मुद्दत से भटके लिए प्यास हमसाक़िया आज जी भर पिला दीजिए इल्तिजा कर रहा है ये रह-रह के दिलफ़ासला आज हर इक मिटा दीजिए कर रही हैं बहारें…

  • आज़म क्यों न उदास रहे | Dil Udaas hai Shayari

    आज़म क्यों न उदास रहे ( Aazam kyon na udaas rahe )    उल्फ़त का गाया साथ नग्मात नहीं है? प्यार की करी कोई भी बात नहीं है तक़दीर न जानें कैसी है अपनी तो उल्फ़त को क्यों होती बरसात नहीं है वरना प्यार वफ़ा मिलती हर पल उसको समझे उसने दिल के जज़्बात नहीं…

  • है तेरी रहमत ग़ज़ब | Hai Teri Rahmat Gazab

    है तेरी रहमत ग़ज़ब ( Hai teri rahmat gazab )   है गज़ब की शान तेरी है तेरी रहमत गज़ब मेंरे मौला तेरी अज़मत है तेरी ताकत ग़जब। है अजब ये बात की मैं उफ़ भी कर दूं तो क़हर और उससे क़त्ल होकर भी मिले राहत ग़जब। दे रहा था हक़ मेरा मुझको मगर…

  • एक नगमा प्यार का | Poem Ek Nagma Pyar ka

    एक नगमा प्यार का ( Ek nagma pyar ka )    आ गए तो रस्म़ महफ़िल की निभाते जाइए एक नग़मा प्यार का सबको सुनाते जाइए। कौन है क्या कह रहा अब फ़िक्र इसकी छोड़िए मुस्कुराकर दिल रक़ीबों का जलाते जाइए। दो जहां को छोड़ दें हम आपकी ख़ातिर सनम है फ़क़त ये शर्त की…

  • यह भी कोई बात हुई | Yeh Bhi koi Baat Hui

    यह भी कोई बात हुई ( Yeh Bhi koi Baat Hui ) कुछ तो बोलो जान-ए-राह़त यह भी कोई बात हुई।तोड़ गए तुम अ़ह़्द-ए-उल्फ़त यह भी कोई बात हुई। एक ज़रा सा दिल क्या टूटा राहे मुह़ब्बत में दिलबर।भूल गए तुम नाज़ो नज़ाकत यह भी कोई बात हुई। मिलते तो हो हम से लेकिन दिल…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *