Deepak ka Ujala

दीपक की महिमा

दीपक की महिमा

दीपावली का त्यौहार है
खुशियों की बाहर लाया।

दीपों की सजी कतार है
जगमगा रहा पूरा संसार हैं।

अंधकार पर प्रकाश की विजय लाया
सुख समृद्धि भाईचारे का संदेश लाया।

किसानों के चेहरे पर खुशी की लाली आई
सभी की आंखों में अलग ही चमक आई

मां लक्ष्मी घर घर पधार रही है
चारों ओर खुशियों की लहर फैल रही है।

चहुं और दीपक कि लौ जल रही है
ढोल पतासे से बम पटाखे फूट रहे हैं।

बुराई पर अच्छा है की जीत हुई है
श्री राम अयोध्या को लौट रहे हैं।

मौसम ने भी करवट बदल रहा है
सर्द ऋतु का आगमन हो रहा है।

बाजारों की उदासी हो गई है कही गुल
सब खरीद रहे हैं नए वस्त्र आभूषण।

Lata Sen

लता सेन

इंदौर ( मध्य प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • विवाह संस्कार

    विवाह संस्कार सात फेरे लेकर हम दोनों मिले,एक दूसरे के साथ जीवन का संगम बनाएं,और साथ में जीवन की यात्रा पर निकले। विवाह के बंधन में बंधने से ना डरें,एक दूसरे के साथ जीवन की यात्रा पर चलने का वचन दें,और साथ में जीवन की यात्रा पर निकलने का वचन दें। सात फेरे लेकर हम…

  • Hindi Poetry On Life | Hindi Ghazal -सजा

    सजा ( Saza )     मेरी गलतियों की मुझको सजा दे गया, बेवफा  था   मुझे   वो   दगा   दे  गया।     क्या   बताए   हमें   क्या सजा  दे गया, मेरी खुशियों  के  सपने  जला  के गया।     आइने  सा  ये  दिल तोड कर चल दिया, इतने  टुकडे किये कि मैं गिन ना सका।  …

  • धरोहर | Dhrohar kavita

     धरोहर  ( Dhrohar :  Kavita )   ->बड़ी सुरक्षित हैं मेरे पास , तेरी धरोहर . . . . ॥ 1 .समेटकर रखी है मैंने , तेरी सारी यादों को ।  ये अक्सर आती हैं,और रूला देती हैं मुझे । नम हो जाती हैं मेरी आँखें , झरने सी बहती हैं । सजाकर रखी हैं…

  • मैं भारतीय हूं | Poem Main Bharatiya Hoon

    मैं भारतीय हूं ( Main Bharatiya Hoon )     मैं भारतीय हूं सभी धर्मों का सदा आदर करता हूं। संस्कृति उपासक हूं शुभ कर्मों से झोली भरता हूं।   शौर्य पराक्रम स्वाभिमानी रगों से गहरा नाता है। रणभूमि में जोहर दिखलाना शमशीरों से आता है।   अतिथि आदर करना पावन परिपाटी वतन की। उस…

  • काश!

    काश! कर्म न जाने ,धर्म न जाने फिर सोचे यही बातकाश ! ये करता ,काश! वो करताकाश ! ये होता, काश ! वो होताकाश -काश कश्मकश में उलझा है इंसान ,माया के इस चक्रव्यूह में फंसा हुआ है नादान। सत्य ना बोले ,नित्य ना होवे,फिर सोचे यही बातकाश ये सुनता ,काश वो सुनताकाश ये होता,…

  • अश्क नहीं खून | Ashk nahi Khoon

    अश्क नहीं खून ( Ashk nahi khoon )    आँखों से खून तभी बहा करते हैं जब इनसे अश्क बहना बंद कर देते हैं जख्म देने वाले कोई दुश्मन होता नहीं बल्कि वो कोई अपना ही रहा करते हैं ये सिर्फ अपने खुशी के लिए घर नहीं बल्कि पुरा संसार ही जला दिया करते हैं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *