Deepika Rukmangad ke Dohe

दीपिका रुखमांगद के दोहे | Deepika Rukmangad ke Dohe

दीपिका रुखमांगद के दोहे

( Deepika Rukmangad ke Dohe )

रटती शिव का नाम हैं,रसना दिन अरु रात।
सावन में मन डूबता,डूब गई है गात।।

रिमझिम बरसी है घटा, बुझती धरती प्यास।
सावन झूला झूलते,गौरी शंकर पास।।

प्यारा लगता मास है,शिव मिलने की आस।
सावन का मेला लगा, सभी भक्तों को खास।।

शिव की पूजा कर रहे,मिलकर नर अरु नार।
गौरी मैया अब करो,सबका बेड़ा पार।।

सावन के झूले पड़े,अब अमवा की डार।
सारी सखियां झूलती,अब गौरा की बार।।

झूले गौरा मात है,भोले बाबा साथ।
पवन हिलोरे दे रही,पकड़ो स्वामी हाथ।।

कवयित्री: दीपिका दीप रुखमांगद
जिला बैतूल
( मध्यप्रदेश )

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