दुश्मनों पे वार कर लूँ

दुश्मनों पे वार कर लूँ

आज खुल कर दुश्मनों पे वार कर लूँ
उनकी ख़ातिर ख़ुद को मैं अख़बार कर लूँ

रफ़्ता-रफ़्ता मैं तुम्हीं से प्यार कर लूँ
जब तलक साँसे हैं मैं इकरार कर लूँ

प्यार कर लूँ कुछ मैं अब तक़रार कर लूँ
उल्फ़तों से ज़ीस्त ये गुलज़ार कर लूँ

वो दवा देंगे यक़ीनन आ के मुझको
गर कहो तो ख़ुद को मैं बीमार कर लूँ

आसमां से गर उतर आया ही है तो
ईद के इस चाँद का दीदार कर लूँ

अब इन्हें दस्तार ओढ़ा कर वफ़ा की
रिश्तों को अपने मैं लाला-ज़ार कर लूँ

आफ़तो में साहिबे किरदार बन कर
मुश्किलों में ख़ुद को मैं ख़ुद्दार कर लूँ

छुट्टी तुझको भी मिले कुछ रोज़ की तो
तेरी ख़ातिर हर दिवस इतवार कर लूँ

हो मुक़म्मल अब ग़ज़ल मीना मेरी भी
ख़ूबसूरत अपने कुछ अशआर कर लूँ

Meena Bhatta

कवियत्री: मीना भट्ट सि‌द्धार्थ

( जबलपुर )

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • हमेशा रहे बेसहारों में शामिल

    हमेशा रहे बेसहारों में शामिल रहे तनहा होकर हज़ारों में शामिलहमेशा रहे बेसहारों में शामिल सदा ही रही है ख़ुशी दूर हमसेरहे हम सदा ग़मगुसारों में शामिल नहीं बन सके हम महाजन कभी भीसदा ही रहे देनदारों में शामिल ज़मीं पे मिलन हो न पाया हमाराचलो होंगे अब हम सितारों में शामिल मिली हमको मन…

  • दुश्मनी अपनी भी तो पुरानी नहीं

    दुश्मनी अपनी भी तो पुरानी नहीं दुश्मनी अपनी भी तो पुरानी नहींबात ये और की उसने मानी नहीं मत कहो प्रेम की अब कहानी नहींसेतु वो प्रेम की क्या निशानी नहीं इश्क़ में चोट अब मुझको खानी नहींरात करवट में सारी बितानी नहीं जिस तरह बाप से बात करते हैं वेयूँ समझ आँख में आज…

  • यार तू हँसना हसाना छोड़ दे

    यार तू हँसना हसाना छोड़ दे यार तू हँसना हसाना छोड़ देलोगो की बातों में आना छोड़ दे इस तरह तू मुस्कराना छोड़ देगम को अपने तू छुपाना छोड़ दे अब न राधा और मीरा है कोईश्याम तू बंशी बजाना छोड़ दे प्यार भी ये इक बला है मान करगीत उल्फ़त के सुनाना छोड़ दे…

  • किशन बाँसुरी तूने जब भी बजाई

    किशन बाँसुरी तूने जब भी बजाई किशन बाँसुरी तूने जब भी बजाई तेरी राधिका भी चली  दौड़ी आई नहीं और कुछ देखने की तमन्ना तुम्हारी जो  मूरत है मन में समाई हुई राधिका सी मैं भी बाबरी अब कथा भागवत माँ ने जब से सुनाई रहे भक्त तेरी शरण में सदा जो भंवर से उसी…

  • चले आइए | Chale Aaiye

    चले आइए आपको दिल पुकारे चले आइएराह पलके बुहारे चले आइए क्या हँसी हैं नजारे चले आइएचल पड़े नैन धारे चले आइए यार छत पर कभी आप आये नज़रतो करें हम इशारे चले आइए पास बैठो कभी तो घड़ी दो घड़ीआपको हम निहारे चले आइए होश बाकी रहा आपको देखकरजुल्फ़ फिर हम सँवारे चले आइए…

  • ह़ाजत तुम्हारी | Ghazal Hajat Tumhari

    ह़ाजत तुम्हारी ( Hajat Tumhari ) मयस्सर हो गर हमको उल्फ़त तुम्हारी। करेंं हर घड़ी दिल से मिदह़त तुम्हारी। न छूटेगी अब हमसे संगत तुम्हारी। हमें हर क़दम पर है ह़ाजत तुम्हारी। हमारी शिकस्ता सी इस अन्जुमन में। मसर्रत की बाइ़स है शिरकत तुम्हारी। जहां भर की दौलत का हम क्या करें,जब। ख़ुशी दिल को…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *