एक दिलदार अपना | Ek Dildar Apna

एक दिलदार अपना

( Ek Dildar Apna )

रखा है सहेजे हुए प्यार अपना
क़िताबों में गुल एक दिलदार अपना

मुहब्बत कसौटी पे बिल्कुल ख़री है
तभी तो जताया है अधिकार अपना

सनम देवता मैंने माना तुम्हीं को
करो तुम भी इक रोज़ इज़हार अपना

फ़लाने की बेटी सगी से भी बढ़कर
जो अस्मत लुटी दिल है बेज़ार अपना

गुनाहों से रजनी बहुत करती नफ़रत
नहीं इसमें शामिल है क़िरदार अपना

रजनी गुप्ता ‘पूनम चंद्रिका’

लखनऊ, उत्तर प्रदेश

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • तौबा | Tauba

    तौबा ( Tauba ) बगावत से करो तौबा, अदावत से करो तौबामगर हर्गिज़ नहीं यारो मुहब्बत से करो तौबा सही जाती नहीं ये दूरियाँ अब इश्क़ में हमसेकहा मानो सनम अब तुम शरारत से करो तौबा बिना मतलब ही मारें लोग पत्थर फेंक कर हमकोये रोने और रुलाने की जहालत से करो तौबा हसीं तुमसा…

  • सरफ़राज़ हुसैन फ़राज़ की ग़ज़लें | Sarfraz Husain Faraz Poetry

    नज़्में कहा करूं न मैं ग़ज़लें कहा करूं नज़्में कहा करूं न मैं ग़ज़लें कहा करूं।वो चाहते हैं उन पे क़स़ीदे पढ़ा करूं। उन पर कहां ये ज़ोर वो मेरी सुनें कभी।मुझको ये ह़ुक्म है के मैं उनकी सुना करूं। आंखों की आर्ज़ू है के देखूं जहांन को।दिल चाहता है उनके ही दर पर रहा…

  • घर नहीं मिला | Ghazal Ghar Nahi Mila

    घर नहीं मिला ( Ghar Nahi Mila ) हमसे मुसाफिरों को कहीं घर नहीं मिला रस्ते बहुत थे राह में रहबर नहीं मिला वीरान रास्तों में पता किससे पूछते राह-ए-सफ़र में मील का पत्थर नहीं मिला दिन रात हम उसी के ख़यालों में ही उड़े तन्हाइयों में चैन तो पल भर नहीं मिला उसके सितम…

  • मेरे भीतर | Rajni ki Ghazal

    मेरे भीतर ( Mere Bheetar ) चढ़ा अपने सनम के इश्क़ का पारा मेरे भीतरग़ज़ल कहने का मौज़ूं है बड़ा प्यारा मेरे भीतर रवानी बन गई है प्रेम की धारा मेरे भीतरहै ए’लान-ए-बहाराँ-सा ये इकतारा मेरे भीतर कहूँ कैसे मैं तुमसे दिल है बेचारा मेरे भीतरन जाने कबसे है पागल ये बंजारा मेरे भीतर तुम्हारे…

  • चुनावी वादे | लुगाई मिलेगी

    लुगाई मिलेगी ( Lugai Milegi ) चुनावी समर में मलाई मिलेगी, कुंवारे जनों को लुगाई मिलेगी ! करा दी मुनादी नेता जी ने घर घर, बूढ़ों को भी सहरा सजाई मिलेगी ! जिताकर हमे जो दिलाएगा कुर्सी, लगी घर में लाइन सगाई मिलेगी ! दुखी है जो घर में भी बेगम सगी से, पड़ोसन हसीं…

  • कितने | Kitne

    कितने ( Kitne )    पेड़ों से पत्ते बिछड़ गये कितने इस जग उपवन से उजड़ गये कितने सारा दिन अब ये चला रहे हैं फ़ोन इस युग के बच्चे बिगड़ गये कितने पहले हर कोई,गुनाहों से था दूर इस पथ को अब तो पकड़ गये कितने सबकी फ़रियादें,कहाँ सुनेगा रब इस दर पर माथा…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *