विध्यालय का पहला दिन | First Day of School

विध्यालय का पहला दिन

( First Day of School )

आया आपकी शरण में गुरुजन…|

प्यार से पुकार कर, पुचकार कर सम्हाल दो ।
मैं आपकी शरण में गुरुजन, मुझमें सुंदर विचार दो ।।
हो जरुरत फटकार दो, झाड दो लताड़ दो।
अपने पन की आश-प्यार, ज्ञान का प्रकाश दो ।।

हूँ अभी मैं कोरा कागज,जो आप चाहें उतार दो।
भले-बुरे की न समझ मुझमें,अब आप मुझको निखार दो l
इधर-उधर न भटक जाऊँ मुझे सीधी-संगत कतार दो l

मैं अबोध बालक हूँ गुरुजन, मेरी जिन्दगी संवार दो ।
मन में मेरे सम्मान हो,सब जीवों के प्रति सम्मान दो।
करूँ मै अच्छा,रहूँ मै सच्चा,बस यही ईमान दो l
आज पहला दिन है मेरा,विध्यालय में अधिकार दो l
जिम्मेदारी ले कर मेरी,सफल कर मुझे सरकार दो l
आया आपकी शरण में गुरुजन….|

लेखक:  सुदीश भारतवासी

Email: sudeesh.soni@gmail.com

यह भी पढ़ें :

संतान रत्न | Film Script Santaan Ratna

Similar Posts

  • पौधे देख सुन सकते हैं | Poem on plant in Hindi

    पौधे देख सुन सकते हैं ( Paudhe dekh sun sakte hain ) *****   देख सुन और बात है करते! पौधे ! क्या आप हैं जानते ? क्या? हां ,सही सुना आपने- यह सत्य भी है भैया, यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न आस्ट्रेलिया की मोनिका गागलियानों ने है साबित किया। पहले तो थे यही जानते, पौधे हंसते…

  • धीरे धीरे | Dheere Dheere

    धीरे धीरे ( Dheere dheere )    होता है प्यार ,मगर धीरे धीरे उठती है नजर,मगर धीरे धीरे चढ़ता है खुमार,मगर धीरे धीरे होता है इजहार,मगर धीरे धीरे…. खिलती है कली,मगर धीरे धीरे आते हैं भंवरे ,मगर धीरे धीरे होती है बेकरारी ,मगर धीरे धीरे बढ़ता है इंतजार ,मगर धीरे धीरे…. लरजते हैं होठ,मगर धीरे…

  • दुपहरिया | Dupaharia par Kavita

    दुपहरिया ( Dupaharia )   तमतमाती चमक लपलपाती लपक लू की गर्म हवाएं बहती दायें बायें छांव भी गर्म पांव भी नर्म जल उठते थे नंगे जब चलते थे। दुपहरिया को क्या पता? गरीबी है एक खता? मेहनत ही उसकी सजा उसके लिए क्या जीवन क्या मजा पेट के लिए वो तो हमेशा ही जलते…

  • मेरा परिचय | Mera parichay | Kavita

    मेरा परिचय ( Mera parichay )   मैं अगम अनाम अगोचर हूँ ये श्रृष्टि मेरी ही परछाई   मैं काल पुरुष मैं युग द्रष्टा मानव की करता अगुआई   मेरी भृकुटि स्पंदन से आती हर युग मे महा – प्रलय   मैं अभ्यंकर मैं प्रलयंकर हर युग मे मैं ही विष पाई   मैं सतयुग…

  • सुबह | Kavita Subah

    सुबह ( Subah ) अंधकार से उत्पन्न हुई एक किरण आकाश की गहराई से आई है। शिद्दत से प्रयास जारी रखकर, आशा की रोशनी संग मुसकाई है ।। ओस के सुखद स्पर्श से लबरेज पंछियों के कलरव सी मन को भाई है ।। सुबह की मंद मंद चल रही हवा पी के देस की महक…

  • तुम मत रोना प्रिय | Poem tum mat rona priye

    तुम मत रोना प्रिय ( Tum mat rona priye )   तुम मत रोना प्रिय मेरे, यह तेरा काम नही है। जिससे मन मेरा लागा, मोरा घनश्याम वही है।।   जो राधा का है मोहन, मीरा का नटवर नागर। वो एक रसिक इस जग का, मेरा मन झलकत गागर।।   शबरी की बेरी में दिखे…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *