Footpath par

फुटपाथ पर | Footpath par

फुटपाथ पर

( Footpath par )

 

कभी
चल कर
आगे बढ़ कर
दो चार कदम
सड़कों पर
देखो तो,
दिख जायेंगे या
मिल जाएंगे
कुछ ऐसे लोग
फुटपाथ पर
खाते पीते सोते
बेफिक्र निडर होकर।
फिर कभी
चल कर
आगे बढ़ कर
दो चार कदम
देखो तो
गलियों में
जहां बसते हैं
बड़े लोग
अमीर लोग
चिंतित डरे हुए
बंद
दीवारों के बीच।
जीवन की सार्थकता
कहां और
किसमें है?
भौतिकता में?
या
भौतिकता से दूर
स्वछंदता और
स्वतंत्रता में?

रचनाकार रामबृक्ष बहादुरपुरी

( अम्बेडकरनगर )

यह भी पढ़ें :-

ईद का चांद | Eid ka Chand

Similar Posts

  • पिता | Pita ke Upar Kavita

    पिता ( Pita )  ( 4 ) पिता एक उम्मीद है एक आस है , परिवार की हिम्मत और विश्वास है । बाहर से सख्त अंदर से नर्म है, उनके दिल में दफन कई मर्म है। पिता संघर्ष के आंधियों में हौसलों की दीवार है, परेशानियों से लड़ने को दो धारी तलवार है। बचपन में…

  • पुस्तक | Pustak

    पुस्तक  ( Pustak )    गिरने मत दो     झुकने मत दो          गिरे अगर तो                उसे उठा लो,   मुड़ने मत दो     फटने मत दो         मुड़े अगर तो              उसे सधा लो,   भीग भीग कर      गल न जाए          जल वर्षा से               उसे बचा लो,   कट ना…

  • अक्षय तृतीया : आखा तीज

    अक्षय तृतीया : आखा तीज   अक्षय तृतीया पर्व पर इस जीवन को पावन बनाये । पापों व तापों के हैं घेरे उनको ढहाते हुए चले । संसार सागर को पार कर मोक्ष की और बढ़ते चले । उमड़ती घटाएं है यहाँ कामना की , उफनती हैं नादियाँ यहाँ वासना की , हां , भूले…

  • हिन्दी मे कुछ बात है | Short Poem on Hindi Diwas

    हिन्दी मे कुछ बात है ( Hindi me kuch baat hai )    हिन्दी दिवस पर विशेष  (कविता)  हिन्दी अपनी मातृभाषा, हिन्दी में कुछ बात है! हिन्दी बनी राष्ट्र भाषा, भारत देश महान में। ‘नेताजी’ ” के हिन्दी नारे, गूंजे हिंदुस्तान में। ‘गुप्त’ सरीखे राष्ट्र-कवि, ‘तुलसी’ जैसे महाकवि। जाने कितने अमर हो गए, लिखकर इसी…

  • ज्ञान का दीप

    ज्ञान का दीप जिनका किरदार सदाकत है lजिनकी तदरीस से पत्थर पिघलत है llअकेले चलने का आभास न कराया lहमेशा साथ देकर सफल कराया ll ” मित्र ” कहूँ तो ” मन ” शांत है l” भाई ” कहूँ तो ” आत्मा ” तृप्त है ll” गुरु ” कहूँ तो ” पद ” शेष है…

  • तुमने बात न मेरी मानी | Tumne

    तुमने बात न मेरी मानी ( Tumne baat na meri mani )    तुमने बात न मेरी मानी। पहुंच नहीं पाई क्या तुम तक, मेरी करुणापूर्ण कहानी? तुमने बात न मेरी मानी। मैंने प्रेम किया था तुमसे, एक आस अन्तर ले अपने। पर तुमने ठुकराया जी भर, सत्य हुये कब, मेरे सपने। नहीं तु़म्हें शीतल…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *