गासो का प्रकाश | Gaso ka Prakash

गासो का प्रकाश

( Gaso ka Prakash ) 

 

एक रवि
जो हमें हर रोज दिखाई देता है
जो दिन में दिखाई देता है
एक रवि
जो हमें छोड़ कर चले गए
वो नहीं आयेंगे
उसका प्रकाश
दिन रात
हर वक्त
हर घड़ी
होता था
गरीबों और मजदूरों में
उन्होंने बुझे दिलों में
प्रकाश फैलाया
तुम कोई मक्का से आया हुआ
पैगम्बर मोहम्मद था।
प्रगति शीलता में मार्क्स था‌
सूफियों में फरीद सा
पता नहीं कहां चले गए
वो लौट कर नहीं आ सकते
उनके काम
हमेशा हमेशा जिन्दा रहेंगे।
सलाम बारम्बार ‌।।

 

Manjit Singh

मनजीत सिंह
सहायक प्राध्यापक उर्दू
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ( कुरुक्षेत्र )

यह भी पढ़ें :-

मज़दूरों की दिवाली और कामकाज

Similar Posts

  • रामनवमी | Ram navmi kavita

    रामनवमी ( Ram navmi )   रघु कुल में उत्पन्न दशरथ लाल राम कोशल्या की कोख से दशरथ लाल राम सनातन में शुभ दिवस नवमी राम जन्म अवध नगरी जगमग हुआ राम का जन्म घर में हर्ष अपार सजी आंगन रंगोली नगर में ख़ुशी छाई ढोल बजाता ढोली थाल भर मोतियों दासियां कर रही दान…

  • हकीकत की भूल | Kavita Haqeeqat

    हकीकत की भूल ( Haqeeqat ki Bhool )    संवरती नही कभी हकीकत की भूल नुमाइश की जिंदगी कागज के फूल बंजर जमीं के नीचे व्यर्थ बीज की गुणवत्ता लोभी नेता के हाथों फली कब देश की सत्ता भरते हैं उडान हरे परिंदे सभी को आसमान नहीं मिलता और की उम्मीद पर गुल नही खिलता…

  • उड़ान हौसलों की | Udaan Hauslon ki

    उड़ान हौसलों की ( Udaan hauslon ki )   जरूरी नही की स्वयं पर उठे हर सवालों का जवाब दिया ही जाय जरूरी है की उठे सवालों पर गौर किया जाए.. प्रश्न तो हैं बुलबुलों की तरह हवा के मिलते ही बिलबिला उठते हैं सोचिए की आपका बैठना किस महफिल मे है… किसकी आंखों ने…

  • मुझे गुरूर है कि | Kavita Mujhe Guroor hai

    मुझे गुरूर है कि ( Mujhe guroor hai ki )    मुझे गुरूर है कि मैं भारत देश का वासी हूं। लेखनी का दीप जलाता हरता हर उदासी हूं। लुटाता प्यार के मोती शब्दों की बहारों से। खुशियां ढूंढता रहता हंसी चेहरों नजारों में। मुझे गुरूर है बिटिया का पिता हूं मैं प्यारा। महके आंगन…

  • पुरुषों | Purushon

    पुरुषों ( Purushon )    यूं ही कब तक जलती रहेगी नारी हवस की इस आग मे पुरुषों कब तक रहोगे तुम खून को पीते देह के चीथड़े नोच नोच पुरुषों.. नारी केवल वही नारी नही कुत्तों जिसे कहते मां ,बहन ,बेटी कुत्तों नारी वह भी है जो पल रही कहीं बनने को तुम्हारी बीबी…

  • कौन हूँ मैं | Kavita

    कौन हूँ मैं? ( Kaun hoon main kavita )   सहमी सहमी कमजोर नहीं हूं भीगी भीगी ओस नहीं हूं आसमान पर उड़ने वाली चंचल चितवन चकोर नहीं हूँ   कोमल कच्ची डोर नहीं हूं अनदेखी से उड़ने वाली शबनम सम छोटी बूँदों जैसी खुशबू भीनी हिलौर नहीं हूं   कुछ जुमलों से डर जाउंगी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *