कविता गऊ | Gau mata par kavita

कविता गऊ

gau mata par kavita

 

चीतो के आने से
होता अगर विकास ll

गायो के मरने पर
उड़ता नही परिहास ll

पूजते थे गाय को
भूल गए इतिहास ll

गोशाला मे ही अब
भक्ष रहे गोमांस ll

महंगाई के कारण
मिलत नही है दानll

भूखी गाय घूमती
द्वारे द्वारे छान् ll

रोटी देने वाले
खीच रहे है हाथ ll

दिखत नही उल्लास है
देने उनका साथ ll

बेकद्री गाय की हुई
होता है आभास ll

दिया दूध जब तक ही
रखते अपने पास ll

रही नहीं काम कि
देत नही है घास ll

आवारा छोडा उसे
खुले गगन आकाश ll

गोपाल फिर आइये
रक्षा करने आप ll

प्रीति बड़े ऐसी अब
मिट जाये संताप ll

❣️

डॉ प्रीति सुरेंद्र सिंह परमार
टीकमगढ़ ( मध्य प्रदेश )

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