Geet kitabi gyan

किताबी ज्ञान | Geet kitabi gyan

किताबी ज्ञान

( Kitabi gyan )

 

जीवन का अनुभव सच्चा है झूठा है अभिमान
ढाई आखर प्रेम का सच्चा व्यर्थ किताबी ज्ञान
सभ्यता संस्कार जीवन में व्यवहार सिखाते हैं
किताबी ज्ञान के दम पर मानव ठोकरें खाते हैं
हम तूफां से टकराते हैं

माना पुस्तक मार्गदर्शक राह सही दिखलाती है
असल जिंदगी में तो भाई अड़चनें कई आती है
धैर्य शील विनय सारे गुण हमें संघर्षों से आते हैं
लगन हौसलों से हम जीवन में सफलता पाते हैं
हम तूफां से टकराते हैं

किताबी ज्ञान सहायक है जीवन का ज्ञान जरूरी है
कलम कदम पे परीक्षाओं की रखना तैयारी पूरी है
आदर मान सम्मान बड़ों को छोटों को देना दुलार
असहायों की मदद करना वक्त सिखाता व्यवहार
सिर्फ किताबी ज्ञान से हम बस धनसंपदा पाते हैं
जीवन का सुख अनुभव ही मानव को देकर जाते हैं

?

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

पुज्य पितर | Kavita pujya pitar

 

Similar Posts

  • राम आयेंगे- राम आयेंगे | Ram Aayenge

    राम आयेंगे- राम आयेंगे   ” राम आयेंगे- राम आयेंगे” राम गये ही कब थे जो राम आयेंगे राम कहीं गये हैं क्या ? अयोध्या छोड़ कर राम तो — युगों-युगों से यहीं हैं सरयू जी के निर्मल नीर से पूछो राम बनवास गये तो भी यहीं रहे पादुकाओं के रूप में राम किसी विशेष…

  • Badal par Hindi Kavita | बादल

    बादल! ( Badal )    मेरी मुंडेर की तरफ बढ़ रहा बादल, अरब सागर की तरफ से चढ़ रहा बादल। न जाने कितने क्विंटल पानी से है भरा, तूफानी हवाओं से भी लड़ रहा बादल। सूख चुके तालाब,नदी,डैम न जाने कब के, उनकी चीख- चीत्कार को सुन रहा बादल। सागर की कोख से फिर जन्म…

  • उम्मीद | Poem Ummeed

    उम्मीद ( Ummeed ) एक उम्मीद सी,दिल में रहती है । जो प्यार से, हमसे कहती है । चिंताएं सारी ,छोड़ भी दो । खुशियों से , नाता जोड़ ही लो । वो दिन भी, जल्दी आयेगा । मन ,आनंदित हो जायेगा । जब साथ, मिलेगा अपनों का । संग संग देखे , सब सपनों…

  • सुनहरी सुबह  | Kavita

        सुनहरी सुबह   ( Sunahri subah )      सुनहरी सुबह नि:स्वार्थ भाव से प्रतिदिन सुबह आती है || आँख बंद थी अभी, खोए थे मीठे सपनों में | कुछ हंसीन प्यारे पल थे, हमारे अपनों में | तभी सुनहरी धूप ने दस्तक दी, नींद टूट गई | अंगडाई ले कर उठ गए, और…

  • मौत मुक्ति तो नहीं है | Maut par Kavita

    मौत मुक्ति तो नहीं है ( Maut mukti to nahi hai )    मृत्यु शाश्वत सत्य है जग में मौत मुक्ति तो नहीं है। मिले हरि भजन से आसान युक्ति तो नहीं है। स्वर्ग गए सिधार कहो कह दो मृत्यु को प्राप्त हुए। कर्मभूमि में शुभ कर्म जो सांसों में हरि व्याप्त हुए। जितनी सांसे…

  • जगाने कौन आया है | Geet

    जगाने कौन आया है ( Jagane kaun aaya hai )   भरी बरसात में मुझको जगाने कौन आया है, अंधेरी रात में दीपक जलाने कौन आया है।   ये कैसा कहर कुदरत का ये कैसा शहर मुर्दों का, खुशियों से कहीं ज्यादा लगे प्रभाव दर्दों का।   जगाओ चेतना अब तो बढ़ चलो आमरण सब…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *