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होलिया में रंग कइसे बरसी | Holiya me

होलिया में रंग कइसे बरसी?

 

सइयाँ जी हमार गइलन टर्की हो,
होलिया में रंग कइसे बरसी। (4)

केहू न केहू हमरे गलवा के रगरी,
कब कै भरल बाटे हमरो ई गगरी।
हमरो ई गगरी हो,हमरो ई गगरी,
हमरो ई गगरी हो,हमरो ई गगरी,
चोलिया से रंग कइसे छलकी हो,
होलिया में रंग कइसे बरसी।
सइयाँ जी हमार गइलन टर्की हो,
होलिया में रंग कइसे बरसी।

काहे के तू भेजलू सजनवा के बहरा,
होलिया में अब कैसे लूटबू तू लहरा।
लूटबू तू लहरा हो,लूटबू तू लहरा,
लूटबू तू लहरा हो,लूटबू तू लहरा,
अब तू खोलयबू केसे खिड़की हो,
होलिया में रंग कइसे बरसी।
सइयाँ जी हमार गइलन टर्की हो,
होलिया में रंग कइसे बरसी।

चढ़ल खुमार ई फागुनवाँ के देखा,
भरल पिचकारी क्रॉस करे रेखा।
क्रॉस करे रेखा हो,क्रॉस करे रेखा,
क्रॉस करे रेखा हो,क्रॉस करे रेखा,
घड़िया कै सुइया कैसे सरकी हो,
होलिया में रंग कइसे बरसी।
सइयाँ जी हमार गइलन टर्की हो,
होलिया में रंग कइसे बरसी।

सोहरल बदनिया हमार भइल माटी,
धधक लै अंदर से जइसे देखा भाथी।
जइसे देखा भाथी हो,जइसे देखा भाथी,
जइसे देखा भाथी हो,जइसे देखा भाथी,
नागिन सेजरिया हमें काटी हो,
होलिया में रंग कइसे बरसी।
सइयाँ जी हमार गइलन टर्की हो,
होलिया में रंग कइसे बरसी।

Ramakesh

रामकेश एम यादव (कवि, साहित्यकार)
( मुंबई )

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