Geet tasveer

जब जरूरत पड़े तो तस्वीरें देखिए

जब जरूरत पड़े तो तस्वीरें देखिए

 

जब जरूरत पड़े तो तस्वीर देखिए
मेरी आँखों में उमड़ा भी नीर देखिए

पास हैं दो दूरी आप बनाएं हैं अभी
देख सकें तो मेरी तकदीर देखिए

आइने में तो हम आपके मिल जाएंगे
अश्कों की मेरी लकीर लकीर देखिए

हम भंवर में पड़े तो हम छूट जाएंगे
नदी देखिए किनारे का तीर देखिए

प्यार से जो कटती है जिंदगी अपनी
इस योगन की भी तो तकदीर देखिए।

Vidyashankar

विद्या शंकर विद्यार्थी
रामगढ़, झारखण्ड

यह भी पढ़ें :-

सांप तुम सभ्य कब हुए

Similar Posts

  • देश हमारा है

    देश हमारा है ( गीत )* देश हमारा है, सरकार हमारी है,क्यों न निभाई, हमने जिम्मेदारी है?*नियम व्यवस्था का पालन हम नहीं करें,दोष गैर पर निज, दोषों का नहीं धरें।खुद क्या बेहतर कर सकते हैं, वही करें।सोचें त्रुटियाँ कितनी कहाँ सुधारी हैं?…*भाँग कुएँ में घोल, हुए मदहोश सभीकिसके मन में किसके प्रति आक्रोश नहीं?खोज-थके, हारे…

  • अगर तुम कहो | Nagma Agar Tum Kaho

    अगर तुम कहो ( Agar Tum Kaho ) गुल वफ़ा के लुटा दूं अगर तुम कहो। राह में दिल बिछा दूं अगर तुम कहो। आओ तो इस तरफ़ जाने जानां कभी। कर दूं क़ुर्बान तुम पर मैं यह ज़िन्दगी। ताज की क्या ह़क़ीक़त है जाने अदा। ताज मैं भी बना दूं अगर तुम कहो। राह…

  • मंदाकिनी बहने लगे

    मंदाकिनी बहने लगे तार वीणा के छिड़े तो , बस एक स्वर कहने लगे ।छेड़ ऐसी रागिनी दो , मंदाकिनी बहने लगे । गूँजती हैं फिर निरंतर , वेद मंत्रों की ऋचाएं ।अग्नि कुंडों में कहाँ तक, प्यार की समिधा जलाएं ।हम अमा की पालकी में , पूर्णिमा कितनी बिठाएं ।क्यों अकेले ही विरह की…

  • गृहलक्ष्मी तुम्हें नमस्कार | Grihalakshmi

    गृहलक्ष्मी तुम्हें नमस्कार ( Grihalakshmi tumhe namaskar )    घर आंगन की ज्योति तुम हो, तुम दीपों की हो बहार। तुम घर की महारानी प्यारी, तुम प्रियतम का हो प्यार। गृहलक्ष्मी तुम्हें नमस्कार झिलमिल दीपों सी रोशन हो, दमकता चेहरा तुम्हारा। मनमंदिर में बसने वाली, दिव्य ज्योति हो उजियारा। जीवन पथ की हो संगिनी, भावों…

  • शिव का सजा दरबार सावन में | Shiv ka Saja Darbar

    शिव का सजा दरबार सावन में ( Shiv ka saja darbar sawan mein )    जल भर लोटा हाथों में सजा लो कावड़ भक्तों। भोले शिव का करो ध्यान उठा लो कावड़ भक्तों। हर-हर महादेव सब बोलो बढ़ते चलो वन वन में। त्रिनेत्र त्रिशूलधारी सदाशिव भोलेनाथ रखो मन में। शिव का सजा है दरबार सावन…

  • श्रमिक दिवस गीत

    श्रमिक दिवस गीत तुम वर्तमान के पृष्ठों पर ,पढ़ लो जीवन का समाचार ।क्या पता कौन से द्वारे से ,आ जाये घर में अंधकार।। आशा की किरणें लौट गयीं ,बैठी हैं रूठी इच्छायेंप्रात: से आकर पसर गईं ,आँगन में कितनी संध्यायेंइन हानि लाभ की ऋतुओं में, तुम रहो सदा ही होशियार ।।तुम वर्तमान—– चल पड़ो…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *