मुंतज़िर रहता खुशी को | Ghazal Muntazir Rahta

मुंतज़िर रहता खुशी को

( Muntazir Rahta )

मुंतज़िर रहता खुशी को मन बहुत
कट रहा है गम भरा जीवन बहुत

प्यार की खुशबू से मैं वीरान हूँ
है कहीं उल्फ़त भरा गुलशन बहुत

एक मैं हूँ प्यार से भीगा नहीं
प्यार का बरसा कहीं सावन बहुत

जिंदगी में भेज दे कोई हसीं
जिंदगी में रब अकेलापन बहुत

फ़ूल जब से प्यार का उसको दिया
बन गये है जान के दुश्मन बहुत

जुल्म अपनों के सहे इतने मगर
दुख भरा मेरा कटा बचपन बहुत

छोड़ जब आज़म दिया इस्कूल है
रोज़ घर में ही हुई अनबन बहुत

शायर: आज़म नैय्यर
(सहारनपुर )

यह भी पढ़ें :-

ऊंचा रहे तिरंगा | Ooncha Rahe Tiranga

Similar Posts

  • तुझे ताजदार करना है

    तुझे ताजदार करना है वफ़ा की राह को यूँ ख़ुशग़वार करना हैज़माने भर में तुझे ताजदार करना है भरम भी प्यार का दिल में शुमार करना हैसफ़ेद झूठ पे यूँ ऐतबार करना है बदल बदल के वो यूँ पैरहन निकलते हैंकिसी तरह से हमारा शिकार करना है ये बार बार न करिये भी बात जाने…

  • मुस्कुराने के बाद | Muskurane ke Baad

    मुस्कुराने के बाद ( Muskurane ke Baad ) दिल की महफ़िल से मुझको उठाने के बादकोई रोता रहा मुस्कुराने के बाद उनके तीर – ए – नज़र का बड़ा शुक्रियाज़िन्दगी खिल उठी चोट खाने के बाद हौसलों को नई ज़िंदगी दे गयाएक जुगनू कहीं झिलमिलाने के बाद उसने दीवाना दिल को बना ही दियाइक निगाह…

  • नाम तेरा | Naam Tera

    नाम तेरा ( Naam Tera ) नाम तेरा सदा गुनगुनाता रहा । मन ही मन सोचकर मुस्कराता रहा ।। जब कभी ख्वाब में आप आये मेरे । रात फिर सारी घूँघट उठाता रहा ।। क्या हुआ मुश्किलों से जो रोटी मिली । प्रेम से तो निवाला खिलाता रहा ।। बद नज़र है जमाने की सारी…

  • ग़लती हमारी थी | Galti Hamari thi

    ग़लती हमारी थी ( Galti hamari thi )   हुआ जो हादसा ए इश्क़ वो गलती हमारी थी खड़ी सरकार के हक़ में लड़ी आवाम सारी थी। लगेंगी तोहमतें हम पर बहुत ये इल्म़ था हमको वही अच्छे वही सच्चे हमें ये जानकारी थी। वफ़ा करके भी हम हरदम खटकते हैं नज़र में क्यूं यही…

  • बड़ा दिलकश मैं मंजर देखती हूँ

    बड़ा दिलकश मैं मंजर देखती हूँ बड़ा दिलकश मैं मंजर देखती हूँतेरी आँखों में सागर देखती हूँ हुई मा’दूम है इंसानियत अबहर इक इंसान पत्थर देखती हूँ पता वुसअत न गहराई है जिसकीवो सहरा दिल के अंदर देखती हूँ हुनर ज़िंदा रहेगा है ये तस्कींमैं हर बच्चे में आज़र देखती हूँ न ग़ालिब और कोई…

  • मौजू सुहाने आ गये

    मौजू सुहाने आ गये वो बहाने से हमें हर दिन बुलाने आ गयेशायरी के वास्ते मौजू सुहाने आ गये इस कदर डूबे हुए हैं वो हमारे प्यार मेंउनकी ग़ज़लों में हमारे ही फ़साने आ गये अनसुनी कर दी जो हमने आज उनकी बात कोहोश इक झटके में ही उनके ठिकाने आ गये उस घड़ी हमको…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *