ज़ख्म यादों के | Zakhm Yaadon ke

ज़ख्म यादों के

( Zakhm yaadon ke ) 

 

न जानें मुझसे वहीं दिल अजीब रखता है
नहीं मुहब्बत नफ़रत वो क़रीब रखता है

बुरा किया भी नहीं है कभी उसी का ही
वहीं दिल को क्यों मुझी से रकीब रखता है

किसे देखेगा मुहब्बत भरी नज़र से वो
मुहब्बत से ही वहीं दिल ग़रीब रखता है

उड़द जाते है किसी की ज़ख्म यादों के ही
की ज़ख्म पर जब भी पट्टी तबीब रखता है

नमाज रोज़ पढ़े है करे सजदा रब को
उसे ख़ुशी से ख़ुदा ख़ुशनसीब रखता है

कभी किसी का बुरा कर नहीं सकता है वो
जहान जो भी मगर दिल अदीब रहता है

ख़िलाफ़ आज़म करे है वहीं साज़िश मेरे
नहीं मुझसे दिल वहीं हबीब रखता है

शायर: आज़म नैय्यर
(सहारनपुर )

यह भी पढ़ें :-

जान देंगे हमेशा वतन के लिये | Watan ke Liye

Similar Posts

  • वक्त की आज हार हो जाए

    वक्त की आज हार हो जाए वक्त की आज हार हो जाए ।कश्ती तूफां में पार हो जाए ।।१ आज दीदारे- यार हो जाए ।ख़त्म यह इंतज़ार हो जाए ।।२ यह जो दुनिया हमें दगा देती ।कुछ तो इसमें सुधार हो जाए ।।३ ज़ीस्त भर दोनों साथ साथ चलेंगर उन्हें ऐतबार हो जाए ।।४ इक…

  • परिवार अपना | Parivar Shayari

    परिवार अपना ( Parivar Apna ) जहाँ से निराला है परिवार अपनाइसी पे लुटाता रहूँ प्यार अपना कदम बेटियों के पड़े घर हमारेमहकने लगा है ये संसार अपना ये बेटे बहू कब हुए है किसी केजो इनपे जताऊँ मैं अधिकार अपना मजे से कटी ज़िन्दगी भी हमारीचला संग मेरे जो दिलदार अपना करूँ मैं दुआएं…

  • अगर साकी | Agar Saqi

    अगर साकी ( Agar Saqi )    बता देते तो अच्छा था कहाँ तेरी नज़र साकी तो फिर हम झट से कर देते पियाला भी उधर साकी ॥ दिया ना जाम वो जिसकी तमन्ना थी मिरे दिल में गिला क्या अब तिरे मय का नहीं होगा असर साकी ॥ छलक जाता जो पैमाना , क़यामत…

  • किसी के इ़श्क़ में | Kisi ke Ishq Mein

    किसी के इ़श्क़ में ( Kisi ke Ishq Mein ) बेफ़ैज़ ज़िन्दगानी का अफ़साना बन गया।दिल क्या किसी के इ़श्क़ में दीवाना बन गया। फूलों के मिस्ल खिल गया हर ज़ख़्म का निशां।जो ज़ख़्म उसने दे दिया नज़राना बन गया। वो थे क़रीबे क़ल्ब तो ह़ासिल थे लुत्फ़ सब।जाते ही उनके घर मिरा ग़म ख़ाना…

  • भीड़ भक्तों की मय्या तेरे द्वार है

    भीड़ भक्तों की मय्या तेरे द्वार है भीड़ भक्तों की मय्या तेरे द्वार हैइनकी कश्ती फँसी आज  मझधार है जब भी भक्तों पे संकट की आई घड़ीदुर्गे माँ ने लिया तब ही अवतार है दैत्य दानव दरिंदों के संहार कोमाँ उठाती सदा अपनी तलवार है झूमते नाचते धुन पे गरबे की सबहर्ष उल्लास भरता ये …

  • है इबादत मुहब्बत | Hai Ibadat Muhabbat

    है इबादत मुहब्बत ( Hai Ibadat Muhabbat ) है इबादत मुहब्बत, मुहब्बत करें शहर में क्यों किसी से अदावत करें मुल्क पर राज करना अलग बात है हो सके तो दिलों पर हुकूमत करें आँच आने न देंगें वतन पर कभी मिल के हम नेकियों की हिदायत करें दोस्तों से कहो आज फिर मुल्क के…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *