घी दही संग खिचड़ी खाए

घी दही संग खिचड़ी खाए

घी दही संग खिचड़ी खाए

विष्णु ने काटा असुर सिर,
सिर गाड़ दिया मंदराचल पर
जीत सभी संक्रान्ति पर्व मनाये,
रवि उत्तरार्द्ध होकर मकर जाए ।

चीनी की पट्टी, गुड़ का डुन्डा,
तिल का लड्डू मन को भाये।
कुरई में रखकर लाई चूरा,
घी दही संग खिचड़ी खाये।

राज्यों में अनेक नाम प्रसिद्ध,
कहीं खिंचड़ी कहीं लोहड़ी तो,
कही पोंगल माघी, उत्तरायण,
देशवासी मकर संक्रान्ति बुलाए।

पोंगल तमिल समुदाय त्योहार,
फसल कटाई सम्पन्न व्यवहार।
बुरी आदत छोड़ने का संकल्प,
नया साल आरम्भ त्योहार मनाए।

घर साफ कर रंगोली सजाकर,
वर्षा धूप कृषि की अर्चना कर।
अनेक परम्परा, रीति का पालन,
सूरज, गौमाता बैल को हैं पूजते ।

प्रतिभा पाण्डेय “प्रति”
चेन्नई

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • हारना हमको नहीं गवारा | Kavita Harna Humko Nahi

    हारना हमको नहीं गवारा ( Harna Humko Nahi Gavara )   जोश जज्बा रखकर चलते हैं तूफानों   में   हम   पलते  हैं हिम्मत बदले विपरीत धारा हारना  नहीं  हमको  गवारा   संस्कार कुछ ऐसे पाये हैं लक्ष्य  साधने  हम आए हैं अटल इरादे मानस हमारा हारना नहीं हमको गवारा   तूफानों से भीड़ सकते हैं आंधियों …

  • चक्र समय का चलता है | Kavita

    चक्र समय का चलता है ( Chakra ka samay chalta hai )   परिवर्तन नित निरंतर होता जग का आलम बदलता है नई सोच नई उमंगे भर चक्र समय का चलता हैं   सुख दुख जीवन के पहलू आंधी तूफान आते जाते जो लक्ष्य साध कर चलते व़ो मंजिलों को पा जाते   शनै शनै…

  • मंजिल का रास्ता | Manzil ka rasta

    मंजिल का रास्ता ( Manzil ka rasta )    ऐ ख़ुदा माना मंजिल का रास्ता बहोत मुश्किल है , मगर तेरा साथ है, तो मुझसे हर गम दूर है ऐ ख़ुदा पता नहीं, दिल को क्या होता है. कभी फासलों से टूट जाता है, तो कभी खुदसे रूठ जाता है। कभी अपनों पर जान छिड़कता,…

  • Hindi Poetry On Life | Hindi Ghazal -सजा

    सजा ( Saza )     मेरी गलतियों की मुझको सजा दे गया, बेवफा  था   मुझे   वो   दगा   दे  गया।     क्या   बताए   हमें   क्या सजा  दे गया, मेरी खुशियों  के  सपने  जला  के गया।     आइने  सा  ये  दिल तोड कर चल दिया, इतने  टुकडे किये कि मैं गिन ना सका।  …

  • तस्वीरें | Kavita

    हर पल की यादें होती हैं “तस्बीरें” || १. हर तस्बीर कुछ कहती है ,हर तस्बीर की एक कहानी है | हर पल थमा सा लगता है ,तस्बीर उस वक्त की निसानी है | कुछ धुंधली कुछ नई सी हैं , मानो यादों की जवानी है | हर तस्बीर की अपनी अदा है , हर…

  • पापा | Papa

    पापा ( Papa )    वह झुके नहीं वो रुके नहीं वह मेरी बातों पर देखो हंसकर हां कर जाते थे l गुस्सा होने पर मेरे कैसे पास बुला समझाते थेl सही गलत के भेद बता राह नयी दिखाते थे l मेरी लाडो रानी कहकर मुझे सदा बुलाते थे l नपे तुले शब्दों में बोलो…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *