गुप्त नवरात्रि

गुप्त साधनाओं एवम् अपने ईष्ट की प्रसन्नता के लिए गुप्त नवरात्रि है विशेष

नवरात्रि का यदि हम स्मरण करते हैं तो विशेष रूप से नवदुर्गा में दुर्गा पूजा का भाव आता है वैसे हम वर्ष में दो बार दुर्गा पूजा आध्यात्मिक उपासना के साथ धूमधाम से पूजन अर्चन करते हैं लेकिन इसके अतिरिक्त भी साल में दो नवरात्रि आते हैं जिन्हें गुप्त नवरात्रि के नाम से हम सभी लोग जानते हैं यह गुप्त नवरात्रि की ही भांति 9 दिनों तक दुर्गा की साधना पूजा करने के लिए अति विशिष्ट माने जाते हैं।

संसार में शक्ति की उपासना तो सभी करते हैं परंतु यह गुप्त नवरात्र हमारे इष्ट को प्रसन्न करने के लिए हमारे द्वारा की गई श्रद्धा भाव से पूजा अर्चना एवं साधना के लिए श्रेष्ठ हैं।

दुर्गा माता के वैसे तो कई बीज मंत्र हैं जिनके द्वारा हम दुर्गा के विभिन्न रूपों को प्रसन्न कर उनकी साधना करते हैं लेकिन तंत्र विधान कि यदि बात करें तो गुप्त नवदुर्गा में मां पीतांबरा के साथ मां काली,तारा,छिन्नमस्ता , बगलामुखी, धूमावती, षोडशी, भुवनेश्वरी, तिरुपुर भैरवी , मातंगी मां कमला इन 10 महाविद्याओं की पूजा अर्चना गुप्त रूप से की जाती हैं।

यह सभी दस महा विद्याएं भगवान विष्णु से संबंध रखती है इन सब का अवतरण हर रूप में मानव कल्याण के लिए ही हुआ है।

साधकों द्वारा यह सब पूजन अपने-अपने गुरुओं के संरक्षण में किया जाता है साधक इस प्रकार के पूजन से कई प्रकार की सिद्धियां भी अर्जित कर लेते हैं यदि यह सिद्धियां मानव कल्याण की उपयोग में की जाती है तो ईश्वर की कृपा के साथ ही मोक्ष की प्राप्ति होती हैं।

उपासक एवं सड़क इन महाविद्याओं का पूजन रात्रि में करते हैं रात्रि में किया गया पूजन श्रेष्ठ होता हैं, एक बहुत बड़ी मिथ हैं की माता के लिए बलि चढ़ाई जाती है परंतु जो साधक सात्विक रूप से पूजा करते हैं वह कभी निर्दोष जीव की हत्या कर उसकी बलि नहीं चढ़ाते।

बल्कि पूजन विधान के अनुसार नारियल या कुम्हड़े ,कद्दू का प्रयोग कर माता को अर्पित करते हैं। नवरात्रि की यह विशेष पूजा इन नवरात्रि के अलावा विशिष्ट महीने में शुक्रवार ,शनिवार ,चतुर्दशी अमावस्या एवं गुरुवार रात्रि में भी विशिष्ट रूप से की जाती है।

वैसे तो ईश्वर का स्मरण कभी भी किसी भी परिस्थिति में किया जा सकता है परंतु गुप्त नवदुर्गा में हम अपनी ध्यान और साधना के द्वारा देवी भगवती की कृपा प्राप्त करने के लिए मां दुर्गा के किसी भी बीज मंत्र को सिद्ध कर सकते हैं एवं उसे ईश्वर रूपी प्रसाद समझकर अपने दुख सुख सभी में नाम स्मरण करके हम ईश्वर का सानिध्य प्राप्त करते हैं।

कई उपासक इन दिनों गुप्त रूप से देवी भागवत एवम् सतचंडी पाठ से माता की कृपा स्नेह दोनो प्राप्त करते हैं भक्तों को यह अनुभव असीम आनंद और ऊर्जा का अनुभव करता है।

स्वयं के अनुभव से…

आशी प्रतिभा दुबे (स्वतंत्र लेखिका)
ग्वालियर – मध्य प्रदेश

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