विनती करो स्वीकार माँ | वंदना

विनती करो स्वीकार माँ

हे शारदे ,वंदन नमन
विनती करो , स्वीकार माँ ।
शुचिता सदा ,उर में भरो
प्रज्ञा सुफल , शृंगार माँ ।।

श्वेतांबरा ,कर मति विमल
अंतर बहे ,धारा तरल ।
दे लक्ष्य अब ,पावन सकल
भर शक्ति रस ,हर भव गरल ।।

हो स्नेह की ,भाषा नयन
उर में भरो ,संस्कार माँ ।
हे शारदे ,वंदन नमन
विनती करो ,स्वीकार माँ ।।

अभिनव भरो ,चिंतन सदा
स्वर लय भरो ,पावन हृदय ।
सत्यम् शिवम ,शुचि सुंदरम
संपन्न कर अंतर् सदय।।

भर निरझरी ,संगीत की
वीणा करो ,झंकार माँ ।
हे शारदे ,वंदन नमन
विनती करो ,स्वीकार माँ ।।

हो लेखनी ,धर्मार्थ अब
बन सारथी , तू ज्ञान रथ
नित नव सृजन अनुदित करूँ
भागीरथी , दे नित्य पथ ।।

मन में सदा ,आलोक भर
कर शुभ्रता , संचार माँ ।
हे शारदे ,वंदन नमन
विनती करो ,स्वीकार माँ ।।

Dr. Sunita Singh Sudha

डा. सुनीता सिंह ‘सुधा’
( वाराणसी )
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आँख का नूर बनो तो सही | Dr. Sunita Singh Sudha Poetry

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