हमारे नबी

हमारे नबी

हमारे नबी

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हमारे नबी
सबके प्यारे नबी
सबसे न्यारे नबी
दो जहां के आंखों के तारे नबी
जिनके सदके तुफैल में-
खुदा ने रची कायनात
बनाए दिन रात
चमकाए आफताब व मेहताब
हमारे लिए उस नबी ने मांगी दुआएं
बुलंद हैं आज भी उनकी सदाएं
सर सजदे में रख खुदा से की मिन्नत
बख्श दे बख्श दे ऐ खुदा हमारी उम्मत
उठाई हमारे लिए-
न जाने कितनी जहमत
दो जहां के लिए बनकर आए वो रहमत
खुदा के रसूल हमारे पैगम्बर
इशारों पे अपने झुकाए थे अंबर
चांद के दो टुकड़े किए
डूबे सूरज को भी पलट थे दिए
करिश्मा कर दुनिया को दिखाए
नमाज पढ़ना हमें सिखाए
क़ुरान को आसमां से उतार लाए
मगफेरत का रास्ता सुझाए
बेटियों को रहमत बताए
उनसे मोहब्बत और
बुजुर्गो की इज्जत करना सिखाए
हमारी जाहिलियत दूर कर
हमें इंसान बनाए
हम-सब हैं एक आदम की संतान बतलाए
मिलजुल कर रहना हमें सिखाए
कुर्बानी की फजीलतें बतलाए
आज उन्हीं का है विलादत
खुश हैं दुनिया आज निहायत
मना रहे हैं हम-सब ईद मिलादुन्नबी
इंसानियत की राह चल दें उनको खुशी
खुदा को करें राज़ी
बनें नमाज़ी और गाज़ी
है रहमत आमदे रसूल
मांगो सर सजदे में रख दुआएं-
आज होंगी सबकी कबूल
उनकी शान में गुस्ताख़ी न करेंगे बर्दाश्त
फ्रांसीसी राष्ट्रपति!
तुझे दिखाएंगे तेरी औकात
घुटनों पर तुम्हें लाएंगे,
इंसानियत का पाठ पढ़ाएंगे।
शांति सद्भाव की खातिर हद से गुजर जाएंगे,
पर नबी की शान में-
गुस्ताख़ी बर्दाश्त न कर पाएंगे।
सीने से तेरे नफ़रत निकाल फेंकेंगे,
ईमान की ताकत उसमें भरेंगे।
जीएंगे मरेंगे उनकी खातिर,
काटो या जुल्म करो –
ये सर है हाजिर!
छोड़ेंगे न रसूल का दामन,
बांध रखी है सर पर कफ़न।
छोड़ दे ज़िद,
तू भी हो जा रसूले अकरम का मुरीद।
पढ़ लें कलमये तैय्यबा-
ला इलाह इल्लल्लाह मुहम्मदुर्रसूल्लाह
तेरी भी हो जाएगी मगफेरत,
इंसानियत को करने लगोगे प्यार-
छोड़ो ये सारी नफ़रत!

 

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नवाब मंजूर

लेखक-मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

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बात

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