Happy diwali kavita

दीप दिवाली के | Happy diwali kavita

दीप दिवाली के

( Deep diwali ke )

 

आओ,दीप दिवाली के मिलकर जलाएँ हम
आओ, गीत  दिवाली के मिलकर गाएँ हम  ।

 

खुशियों से चमके सबके उर-घर-आँगन
हर्ष की विजय पताका चहु ओर फहराएँ हम ।

 

महलों के चौबारे से लेकर, हर चौराहे तक
सबको प्रेम-बंधुत्व से रहना सिखाएँ हम ।

 

सिले हुए हैं-होंठ,मायूसीयत से जिन लोगों के
उनके लबों तक यह मधुर तराना पहुँचाएँ हम ।

 

 देश-धर्म, समाज-इंसानित के लिए सदा
अपने सभी कर्त्तव्यों को मिलकर निभाएँ हम ।

 

राम-सीता से संस्कारी बन जाएँ सभी युवा
अपने देश को पश्चिमी सभ्यता से बचाएँ हम  ।

 

इस महंगाई-भ्रष्टाचार से परेशान हैं सभी
चलो, सुख-समृद्धि का नन्हा ‘दीप जलाएँ हम ।

 

अपनी आँखों में बसे हैं-जो ख्वाब बहुत से
आज मेहनत से सबको साकार बनाएँ हम ।

 

आओ, दीप दिवाली के मिलकर जलाएँ हम
आओ, गीत  दिवाली के मिलकर गाएँ हम ।

 

?

कवि : संदीप कटारिया

(करनाल ,हरियाणा)

Similar Posts

  • जय मां दुर्गा भवानी | Navratri poem in Hindi

    जय मां दुर्गा भवानी ( Jai Maa Durga Bhavani )   हे खडग खप्पर धारिणी हे रक्तबीज संहारिणी करो कृपा हे मात भवानी सर्व दुख निवारिणी   सिंह आरूढ़ होकर आओ माता मुश्किल हल कर जाओ छाया है घनघोर अंधेरा जीवन में उजियारा लाओ   हे मां शक्ति स्वरूपा मंगलकारिणी सिद्धि अनूपा जग जननी मां…

  • लम्बोदर | पंचाक्षरी पंचपदी

    लम्बोदर 1 पर्व मनाता सभ्यता पूजा करता नैतिकता हमें लक्ष्य है श्रीनिवास! 2 जल्दी उठता स्नान करता व्रत रखता पुण्य मिलता ये आचार हैं श्रीनिवास! 3 गणेश पूजा मनाता प्रजा फूलों से सजा भक्तों की मजा लोगों की रीति श्रीनिवास! 4 लम्बोदर खूब सुंदर उसे आकार अलंकार गणेश रूप है श्रीनिवास! 5 लड्डू बनता नैवेध्य…

  • शिक्षा उपवन | Shiksha Upvan

    शिक्षा उपवन ( Shiksha upvan )    सुसंस्कारों के सौरभ से, शिक्षा उपवन महकता रहे ज्ञान सहज अवबोध , प्रयोग व्यवहार धरातल । निर्माण आदर्श चरित्र, भविष्य सदा उज्ज्वल । आत्म सात कर नूतन, पुरात्तन भाव चहकता रहे सुसंस्कारों के सौरभ से, शिक्षा उपवन महकता रहे ।। शिक्षण अधिगम ज्योत, दिव्यता अप्रतिम प्रसरण । तन…

  • हृदय के गाँठ | Kavita hriday ke ganth

    हृदय के गाँठ ( Kavita hriday ke ganth )   1. हृदय के गाँठ खोल के,आओ बात बढाते है। परत दर परत गर्द है, आओ उसे उडाते है। ये दुनिया का है मेला,भीड मे सब अन्जाने से, पकड लो हाथ मेरा तो,दिल की बात बताते है।   2. खुद लज्जाहीन रहे जो, वो तेरी क्या…

  • बिन्दु | Kavita bindu

    बिन्दु ( Bindu )   ग्रह नक्षत्र योग कला विकला दिग्दिगन्त हैं। बिन्दु मे विलीन होते आदि और अंत हैं।। अण्डज पिण्डज स्वेदज उद्भिज्ज सृजाया है, बिंदु में नित रमण करें ब्रह्म जीव माया है। सकल महाद्वीप महासिंन्धु श्रृंग गर्त न्यारे, अपरिमित निराकार चिन्मय स्वरूप प्यारे।। त्रिगुणी प्रकृति ग्रीष्म शीत पावस बसंत हैं।। बिन्दु में०।।…

  • घर की इज्जत, बनी खिलौना | Ghar ki Izzat

    घर की इज्जत, बनी खिलौना ( Ghar ki izzat, bani khilauna )    अब कहां कोई खेलता है, खिलौनों से साहब?? अब तो नारी की अस्मिता से खेला जाता है। यत्र पूज्यंते नार्याः, रमंते तत्र देवता, बस श्लोकों में ही देखा जाता है। तार तार होती हैं घर की इज्जत, बड़ी शिद्दत से खेल सियासत…

One Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *