हर हाल में मुस्कुराया करें | Har Haal Mein

हर हाल में मुस्कुराया करें

हर हाल में,मुस्कुराया करें ।
दुखों को, भूल जाया करें।
व्यर्थ के, तनावों में ।
जीवन को ना बिताया करें ।
जीवन मिलता है, बस एक बार ।
इसको ऐसे ना गंवाया करें ।
खुशीयों का, लें आनन्द ।
रंजों को , भूल जाया करें ।
ईश्वर से, जो मिला है ।
उस सुख को ही चलो भोगें ।
अपनी इच्छाओं को,
अनन्त ना बनाया करें ।
ईश्वर का भी ,आभार
जिसने रचा संसार ।
भूल से ,भी उन पर ।
हम क्रोध ना दिखाया करें ।
हर हाल में ,मुसकुराया करें ।

Pragati Dutt

प्रगति दत्त

यह भी पढ़ें :

Similar Posts

  • मैं हूं एक जग भिक्षुक

    मैं हूं एक जग भिक्षुक मैं भिक्षुक हूं यारों बस, इस सारे जमाने का,कुछ नहीं है मेरे पास, लोगों को दिखाने का।। जरिया भी नहीं है मेरे पास रोटी कमाने का,साधन भी नहीं खुद को जग से मिटाने का।। मैं कोई गीत भी नहीं हूं जमाने के गुनगुनाने का,मैं सरगम भी नहीं हूं दीवाने के…

  • पतंग | Patang par kavita

    पतंग ( Patang ) *** पतली सी डोर लिए हवाओं से होड़ लिए गगन में उड़ता फर फर ऊपर नीचे करता सर सर। बालमन युवामन को यह भाए विशेषकर मकर संक्रांति जब आए। यूं तो सालों भर बिकता है पतंग, बच्चे उड़ाते होकर मलंग । लिए चलें पतंग सभी, मैदानों को जाएं, या फिर किसी…

  • ये मोबाइल मित्र भी शत्रु भी | Mobile par Kavita

    ये मोबाइल मित्र भी शत्रु भी ( Ye mobile mitra bhi shatru bhi )  ये मोबाईल हमारा है मित्र भी एवं यह है शत्रु भी, बहुत इसके फ़ायदे है और बहुत है नुकसान भी। रखता इसको अमीर भी रखता है सब ग़रीब भी, इसी से होता है वहम फिर भी यही है अहम भी।। मिलता…

  • ईद की नमाज़ | Eid

    ईद की नमाज़ ( Eid ki namaz )    ईद की नमाज़ पढ़तें है‌ सभी देश के मुसलमान, करतें है रोज़े-उपवास और मस्जिदों में अज़ान। इसमें अहम-भूमिका वालीं यें जुम्में की नमाज़, पढें भाई-भाभी चाची-चाची अब्बू-अम्मी जान।। होली अथवा हो दिवाली क्रिस्मस चाहें यह ईद, करतें हैं सभी सूरज का कभी चन्द्रमा का दीद। एकता…

  • बरसाने की राधै | Barasane ki Radhe

    बरसाने की राधै ( Barasane ki Radhe )   वृंदावन में बसे गोवर्धन गिरधारी, बरसाने की राधै रानी लगे प्यारी। यमुना किनारे राधा श्याम पुकारे, खोजते- खोजते राधा रानी हारी।। मुरली बजाते आये कृष्ण-मुरारी, राधा रानी पानी घघरी लेके आई। दोनों यूँ मिले क़दम पेड़ के नीचे, बहुत दिनों से नही मिले हो जैसे।। राधा…

  • माँ की उलाहने

    माँ की उलाहने बिटिया जब छोटी थीमॉं के लिए रोती धी,पल भर न बिसारती थीमाँ – माँ रटती रह जाती थी। थोड़ी सी जब आहट पायेचहुओर नजरे दौड़ाये,नयन मिले जब माँ सेदोंनो हृदय पुलकित हो जाये। अब तो बिटिया हुई सयानीआधुनिकता की चढ़ी रवानी,नये तेवर में रहती है अति बुद्धिमानी अपने को,माँ को बुद्धॣ कहती…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *