हताश जिन्दगी | Hataash Zindagi

हताश जिन्दगी

( Hataash zindagi ) 

देखा है हमने अक्सर हताश जिन्दगी।
हमने भी नही पाई कुछ ख़ास जिन्दगी।।

बे-मौत मर रहे हैं हजारों यहाॅं वहाॅं,
क्यूॅं आती नही है फिर भी,ये रास जिन्दगी,

आकर कोई बताये,ये कैसा फ़लसफ़ा है,
दिखती है कभी दूर कभी पास जिन्दगी।

ऊपर ख़ुदा है रोशन,मैं झूठ न कहूॅं,
जम्मे-ग़फ़ीर में भी,बदहवास जिन्दगी।

 

रोशन सोनकर
ग्राम व पोस्ट जोनिहां,तहसील बिंदकी,

जनपद फतेहपुर ( उत्तर प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

इंसान हूॅं मैं इंसान हूॅं | Insaan Hoon Main

Similar Posts

  • खुशी के आंसू | Kavita

    खुशी के आंसू ( Khushi ke aansu : Kavita )     खुशियों के बादल मंडराये हृदय गदगद हो जाए भावों के ज्वार उमड़े खुशियों से दिल भर आए   नैनों में खुशी के आंसू मोती बनकर आ जाते हैं हर्षित मन के आंगन में आनंद के पल छा जाते हैं   उत्साह उमंगों का…

  • कविता श्रृंखला हमारे शहर में

    कविता श्रृंखला हमारे शहर में  हमारे शहर में बहुत सारे लोग अल्पाहारी हैं साथ ही शुद्ध शाकाहारी हैं. वे लहसुन -प्याज नहीं खाते हैं मगर रिश्वत खाने से बाज़ नहीं आते हैं. तल्ख़! क्या तुमको पता है? रिश्वत सरकारी है रिश्वत सहकारी है रिश्वत तरकारी है रिश्वत खाने वाला ही एकमात्र विशुद्ध शाकाहारी है…..  …

  • मतदान करना | Matdan Kavita

    मतदान करना ( Matdan karna )   बात मानो हमारी सारी जनता । वोट डालने तो जाना पड़ेगा।। लोकतंत्र की यही है जरूरत। इसे मजबूत करना पड़ेगा।। यह जो अधिकार सबको मिला है। यही कर्तव्य करना पड़ेगा ।। चाहे लाखों हों काम वोट के दिन। पर समय तो निकालना पड़ेगा।। एक-एक वोट रहता जरूरी ।…

  • हुंकार की कवितायेँ | Hunkar ki Kavitayen

    हुंकार की कवितायेँ 23. रिश्ते बहुत मजबूत रिश्ते थे, कि कुछ कमजोर लोगो से। निभाते तो भला कैसे, कि कुछ मजबूर लोगो से। कशक थी दिल मे जो मेरे ,बताते तो भला कैसे। बडे बेबस थे हम जुड के, कुछ मशहूर लोगो से। बडे ही सख्त लहजे मे, हमे इल्जाम दे कर के। मोहब्बत को…

  • निर्झर | Kavita Nirjhar

    निर्झर ( Nirjhar )   काश……..तेरी तरह ही मैं भी बन जाऊँ माँ, निर्झर की मानिंद कल-कल बहती जाऊँ माँ, तेरी ही तरह दामन में समेट लूँ ये दुनिया माँ, अपनी शीतलता से जहां नहलाती जाऊँ माँ, इतनी वसअतें खुद में मैं पैदा कर जाऊँ माँ, समन्दर से भी ज़्यादा गहरी मैं बन जाऊँ माँ,…

  • मगरमच्छ के आंसू | Kavita magarmach ke aansoo

    मगरमच्छ के आंसू ( Magarmach ke aansoo )     दिखावे की इस दुनिया में लोग दिखावा करते हैं घड़ियाली आंसू बहाकर जनमन छलावा करते हैं   मगरमच्छ के आंसू टपकाते व्यर्थ रोना रोते लोग अपना उल्लू सीधा करते मतलब से करते उपयोग   भांति भांति के स्वांग रचाते रंग बदलते मौसम सा बात बात…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *