हिन्दुस्तान के हिन्दी हैं हम

हिन्दी | Hindi Par Kavita

हिन्दुस्तान के हिन्दी हैं हम 

( Hindustan ke Hindi Hai Hum )

१. बड़ी मधुर मीठी है , सुन्दर है सुरीली है |
दिल को छू लेने वाली, नाजुक और लचीली है |
हर हिंदुस्तानी की जुवां, पर राज है उसका |
ऐसी हमारी राष्ट्र भांषा, हिन्दी अलबेली है |
हिन्दुस्तान के हिन्दी हैं हम …||

२. हिंदुस्तानी मूरत देखो, हिन्दुस्तानी सीरत देखो |
हिंदुस्तानी चेहरों में, हिन्दुस्तान की सूरत देखो |
मतवाली खट्टी-मीठी, हिन्दी के क्या कहनें हैं |
लोगों की बातों में देखो, हिन्दी नामक गहनें हैं |
हिन्दुस्तान के हिन्दी हैं हम …||

३. हिन्दी भांषा हम भी हिन्दी, हिन्दुस्तान मे रहते हैं |
हिन्दुस्तान की सुन्दरता को, हिन्दी में ही कहते हैं |
मातृ-भांषा अपनी हिन्दी, भारत का अभिमान है |
कानों को सुख देती है , होंठों की ये शान है |
हिन्दुस्तान के हिन्दी हैं हम …||

४. वही मेरी हम-सफर है, वही मेरी जिन्दगी है |
वही मेरी सफलता है, वही मेरी बन्दगी है |
माँ सरस्वती का बरदान है, हम सब इसे स्वीकार करें |
हिन्दी हमारी राष्ट्र भांषा है , हम सब हिन्दी से प्यार करें |
हिन्दुस्तान के हिन्दी हैं हम …||

लेखक : सुदीश कुमार सोनी

यह भी पढ़ें :- 

Hindi

Similar Posts

  • सोच की संकीर्णता | Soch ki Sankirnata

    सोच की संकीर्णता ( Soch ki sankirnata )    पानी है अगर मंजिल तुम्हे, तो कुछ फैसले कठोर भी लेने होंगे जिंदगी की हर ऊंचाई का पैमाना निश्चित नही होता.. कभी कभी सोच की संकीर्णता स्वयं की प्रतिभा को ही निखरने नही देता…. बढ़ाएं तो आएंगी ही कभी अपने से कभी अपनों से और कभी…

  • रामलला प्राण प्रतिष्ठा पर | Ramlala Pran Pratistha Par

    रामलला प्राण प्रतिष्ठा पर ( Ramlala Pran Pratistha Par )   रामलला प्राण प्रतिष्ठा पर,सविनय हार्दिक निमंत्रण सह्रदय करबृद्ध निवेदन, सानुग्रह शुभ मंगल प्रयोजन। बाईस जनवरी दिव्य बेला, घर द्वार उत्सविक आयोजन । विधिवत भव्य आराधना स्तुति, मर्यादा पुरुषोत्तम श्री चरण । रामलला प्राण प्रतिष्ठा पर,सविनय हार्दिक निमंत्रण ।। दीप प्रज्वलन प्रकाश श्रृंगार, स्वच्छ परिवेश…

  • छोटी सी मैया | Choti si Maiya

    छोटी सी मैया ( Choti si maiya )    माता रानी के चरण पड़े हैं आज घर द्वार सब मेरे सजे हैं, आई सिंह पर सवार मेरी मैया करती फूलों से श्रृंगार मेरी मैया छोटी सी कन्या के रूप में आई नवरात्रों की सबको ही बधाई ।। घर आंगन में गूंज रही शहनाई चलने लगी…

  • प्रधान | Pradhan par Kavita

    प्रधान ( Pradhan )    गांव में होता यह प्रधान का पद, मुखियां गांव का होता यह पद ! पांच साल यह जन सेवा करता, गांवों का विकास यही करवाता !! काम होते है सब इनके ही हाथ, देख-रेख एवं समय के अनुसार ! जो कोई करता है अच्छा काम, सम्मानित करता उसको ये गांव…

  • ग़र ना होती मातृभाषा | Matribhasha Diwas Par Kavita

    ग़र ना होती मातृभाषा ( Gar na hoti matribhasha )      सोचो    सब-कुछ    कैसा  होता, ग़र     ना     होती   मातृभाषा ।।   सब     अज्ञानी    होकर    जीते जग-जीवन     का   बौझा  ढोते, किसी  विषय  को   पढ पाने की कैसे   पूरी    होती  अभिलाषा।।   कैसे    अपना     ग़म    बतलाते कैसे    गीत     खुशी    के   गाते, दिल  की  दिल  में ही …

  • पापा | Poem on papa in Hindi

    पापा ( Papa )   हर घड़ी याद आ रही पापा रोज़ आँखों में है नमी पापा   रात दिन दिल उदास है मेरा आपकी है यहां कमी पापा   छोड़कर ही तन्हा गये जब से आपके बिन नहीं हंसी पापा   आपके जाने से यहां दिल में एक पल भी न है ख़ुशी पापा…

2 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *