होली में तेरी याद

होली में तेरी याद

होली में तेरी याद

गुलाल भी फीका, अबीर भी रूठा है,
तेरे बिना हर रंग जैसे टूटा है।
भीड़ में हूँ पर तन्हा खड़ा हूँ,
तेरी हंसी के बिना हर मौसम सूखा है।

जहां एहसासों के रंगों से तेरा चेहरा सजाता था,
आज वही हाथ कांप सा जाता है।
तेरी हँसी की गूंज कहाँ खो गई दिकु,
अब तो हर खुशी का पल भी मुझे दर्द देकर सताता है।

होली का हर रंग तेरा नाम पुकारे,
आ जा दिकु, ये दिल तुझको निहारे।
इंतज़ार की आग में जल रहा हूँ,
तेरे बिना मैं अधूरा सा पल रहा हूँ।

कवि : प्रेम ठक्कर “दिकुप्रेमी”
सुरत, गुजरात

यह भी पढ़ें :

Similar Posts

  • आदमी है जो | Aadmi hai Jo

    आदमी है जो ( Aadmi hai jo )   आदमी है जो  सबको हॅंसाता रहे खुद भी हॅंसता रहे मुस्कराता रहे।   दूर कर दे हर दुखड़े हॅंसी प्यार से जीत ले सारी मुस्किल सदाचार से   लाख बाधाएं आए उसे भूल कर आगे बढ़ते कदम को बढ़ाता रहे, आदमी है जो  सबको हॅंसाता रहे…

  • संकल्प | Sankalp Poem

    संकल्प ( Sankalp )   आज फिर पराजित हुआ हूं फिर से अपनी काबिलियत को पहचान नहीं पाया आज खुद की ही नजरों में गिरा हूं बन गया हूं अपना ही खलनायक आज फिर पराजित हुआ हूं सोचा था, मंजिल का सामना करेंगे, किंतु ,हिम्मत ही जवाब दे गई अफसोस हुआ है मुझे अपने आप…

  • तिरंगा हमारी आन बान व शान है

    तिरंगा हमारी आन बान व शान है तिरंगा हमारी आन बान व शान है। अपने देश के प्रति हमें अभिमान है। जो कहीं देखने को भी नहीं मिलती, हमारे पास वह संस्कृति की खान है। तिरंगा हमारी आन बान व शान है-1 परंपरा और इतिहास देश की शान है । आज़ादी के लिए शहीदों ने…

  • खुशी से झूमता है मन | Man ke geet

    खुशी से झूमता है मन ( Khushi se jhoom ta hai man )    हर्ष का उमड़ पड़ा सावन वादियां महक उठी भावन। प्रीत भरी बूंदे भिगो रही तन खुशी से झूमता है मन। खुशी से झूमता है मन   इठलाती बलखाती लहरें बहती भावों की धारा। दिल की धड़कन गीत गाए मनमीत मिला प्यारा‌…

  • तुझ से जुड़ा इंतज़ार

    तुझ से जुड़ा इंतज़ार यह कहना आसान है कि “भूल जाओ उसे,”पर जिसने सच्चा प्रेम किया, वो उसे भला कैसे भूल पाता।जिस दिल में बसी हो वो आरज़ू बनकर,उसकी यादों से इंसान कभी दूर नहीं जाता। हर रात खामोशियों में उसकी सदा गूंजती है,हर सुबह उसकी चाह में दिल मचल जाता।वो पास नहीं, फिर भी…

  • कागज और नोट | Kagaz aur Note

    कागज और नोट  ( Kagaz aur note )    बचपन में पढ़ने का या अच्छा कुछ करने का मन कहां? और कब? होता है। पर मां समझाती थी एक ही बात बताती थी पढने से कुछ करने से पैसा आता है सहूलियत आती है और ज़िंदगी सुधर जाती है। चड़ पड़ा बस्ता लिए स्कूल को,…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *