जब भी कोई कहीं बिखरता है

जब भी कोई कहीं बिखरता है

जब भी कोई कहीं बिखरता है
अक़्स माज़ी का खुद उभरता है

क्यूँ रखूँ ठीक हूलिया अपना
कौन मेरे लिए संवरता है

चाहतें कब छिपी ज़माने में
क़ल्ब आँखों में आ उतरता है

वस्ल में हाले-दिल हुआ ऐसा
पेड़ झर झर के जब लहरता है

बात कर लेना हल नहीं लेकिन
जी में कुछ पल सुकूं ठहरता है

कुछ तो बतला मुझे ए अच्छे वक़्त
इतनी तेज़ी से क्यूँ गुज़रता है

सिर्फ अपने ही मन की करता हूँ
इसलिए भी ‘असद’ अखरता है

असद अकबराबादी 

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • जज़्बात से | Jazbaat pe Ghazal

    जज़्बात से ( Jazbaat se )    ज़िंदगी चलती नहीं है आज़कल जज़्बात से जूझना पड़ता सभी को रात दिन हालात से। गीत ग़ज़लें और नज़्में भूल जाता आदमी ज़िंदगी जब रूबरू होती है अख़राजात से। क्यूं चलाते गोलियां क्यूं लड़ रहे सब इस क़दर रंजिशों के मामले अक्सर हुए हल बात से। अब के…

  • जख़्म के हर निशान से निकला

    जख़्म के हर निशान से निकला जख़्म के हर निशान से निकलादर्द था वो अज़ान से निकला लोग जो भी छिपा रहे मुझसेबेजुबां की जुबान से निकला इश्क़ के हो गये करम मुझ परतीर जब वो कमान से निकला आँख भर ही गई सुनो मेरीआज जब वो दुकान से निकला आज सब कुछ लिवास से…

  • बोलेंगे | Bolenge

    बोलेंगे ( Bolenge ) रोज़ हम इंकलाब बोलेंगे ? रोज़ ही बेहिसाब बोलेंगे ख़ूबसूरत बड़ी फ़बन इसकी देश अपना गुलाब बोलेंगे रोशनी प्यार की ही देता है देश को आफ़ताब बोलेंगे ये ही मेरी पहचान है जय हिंद जोर से ही ज़नाब बोलेंगे पूछेगा जो गवाह में जय हिंद ये ही अपना ज़वाब बोलेंगे है…

  • ज़िन्दगी खत्म हुई | Poem Zindagi Khatam hui

    ज़िन्दगी खत्म हुई ( Zindagi khatam hui )    जिंदगी खत्म हुई उन्हें पुकारते हुए उनको जीतते हुए हमको हारते हुए क़ौल वो क़रार जो उन्हें तो याद भी नहीं बस उसी क़रार पर उमर गुज़ारते हुए । चार दिन के प्यार का चढ़ा हुआ जो कर्ज़ था हाथ कुछ बचा नहीं उसे उतारते हुए।…

  • नज़रों से मेरे | Nazaron se Mere

    नज़रों से मेरे ( Nazaron se Mere ) नज़रों से मेरे अपनी नज़र जब मिला गयाइस दिल में गुल मुहब्बतों के वो खिला गया रुसवा हैं देते हमको न पैग़ाम वो कोईमिलने मिलाने का भी तो अब सिलसिला गया शरमा रही थी चांदनी भी आज चाँद सेउसको शराब आँखों से कोई पिला गया वो मूल…

  • ज़ख्म यादों के | Zakhm Yaadon ke

    ज़ख्म यादों के ( Zakhm yaadon ke )    न जानें मुझसे वहीं दिल अजीब रखता है नहीं मुहब्बत नफ़रत वो क़रीब रखता है बुरा किया भी नहीं है कभी उसी का ही वहीं दिल को क्यों मुझी से रकीब रखता है किसे देखेगा मुहब्बत भरी नज़र से वो मुहब्बत से ही वहीं दिल ग़रीब…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *