मेरे साथ साथ

मेरे साथ साथ | Mere Sath Sath

मेरे साथ साथ

( Mere Sath Sath )

पहाड़ बन के मेरे साथ साथ चलता रहा
वो एक टुकड़ा था बादल को जो बदलता रहा

लिपट गई तो कलेजे को पड़ गई ठंडक
और इतनी ठंड की फिर रोम रोम जलता रहा

जो लोग पहले ग़लत कर चुके दुआ उनको
उन्हीं को देख के हर गाम मैं संभलता रह

मैं कोशिशों में ही मसरूफ़ रह गया बरसों
न जाने कब मेरे हाथों से सब फिसलता रहा

मैं उसका दोस्त बड़ा खास दोस्त था फिर भी
किसी की हो गई वो और मैं हाथ मलता रहा

असद अकबराबादी 

यह भी पढ़ें :-

तेरी दीद के बाद | Teri Deed ke Baad

Similar Posts

  • ख़बर रखता है

    ख़बर रखता है ज़ख़्म देकर भी वो पल-पल की ख़बर रखता हैनब्ज़ कब बन्द हो इस पर भी नज़र रखता है उसकी उल्फ़त पे यक़ीं कैसे भला मैं कर लूँहैसियत पर जो मेरी आँख ज़बर रखता है जाने कितने ही किराये के मकानों में रहेअपना घर ही मेरा ख़ुश जान जिगर रखता है जब अचानक…

  • आज़मा के देख लिया | Aazma ke Dekh liya

    आज़मा के देख लिया ( Aazma ke dekh liya )    ख़ुदा बना के तुझे, सर झुका के देख लिया अना को ताक पे रख, सब भुला के देख लिया हुस्न ए मतला बड़े ख़ुलूस से उनको बुला के देख लिया हरेक नाज़ भी उनका उठा के देख लिया जुनून तोड़ चुका दम, वफा निभाने…

  • ग़ज़ल हिन्दी में | Ghazal Hindi Mein

    ग़ज़ल हिन्दी में ( Ghazal Hindi Mein ) ( 2 ) आशाओं में बल लगता हैहोगा अपना कल लगता है एक तुम्हारे आ जाने सेयह घर ताजमहल लगता है सींच रहा जो मन मरुथल कोपावन गंगा जल लगता है हम तुम साथ चले हैं जब सेजीवन मार्ग सरल लगता है यह कहना आसान नहीं हैतेरा…

  • फिर कोई तस्वीर | Phir Koi Tasveer

    फिर कोई तस्वीर ( Phir Koi Tasveer ) आज सतह -ए- आब पर इक अक्स लहराने लगाफिर कोई तस्वीर बन कर सामने आने लगा जब से हम को देखकर इक शख़्स शर्माने लगादिल न जाने क्या हमें मफ़्हूम समझाने लगा खिल उठे हैं जब से मेरे घर के गमलों में गुलाबमेरे घर के रास्तों पर…

  • ले गया सकूँ | Sukoon Shayari in Hindi

    ले गया सकूँ ( Le gaya sukoon )    न रही उसको अब उल्फ़त है ? ले गया सकूँ सब राहत है चोट लगी ऐसी दग़ा की कल अब उल्फ़त दिल से रुख़सत है गुल न लिया चाहत का उसने टूटी दिल की ही हसरत है उल्फ़त में ऐसा टूटा दिल न यहाँ दिल को…

  • क्यों गले से लगाया मुझे | Kyon ki Shayari

    क्यों गले से लगाया मुझे ( Kyon gale se lagaya mujhe )    ख़्वाब से जब जगाया मुझे उसने गमगीन पाया मुझे वो सितमगर बहुत देर तक देखकर मुस्कुराया मुझे कोई मंज़िल न रस्ता कोई दिल कहां लेके आया मुझे खुद न लैला बनी उसने पर एक मजनूं बनाया मुझे जब बिछड़ना जरूरी था फिर…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *