Jagte Raho

जागते रहो | Jagte Raho

जागते रहो

( Jagte raho ) 

 

ये जागने के दिन हैं
जागते रहो…
दिन रात भागते रहो
ठहरो न पल भर के लिए भी
क्या पता उस पल ही कोई
कर जाए छल संग तेरे
डाल दे डेरा अपना घर तेरे!
देख रहे हो देश दुनिया में
क्या क्या हो रहा है?
मनुज बन लाश अपना
खुद ही ढ़ो रहा है!
किसी से किसी को रही ना हमदर्दी
जाने किस बला ने
हालत मनुज की ,ऐसी कर दी?
भूला शिक्षा संस्कार व सहकार
नतीजा चहुंओर है हाहाकार
अमेरिका चीन जापान कनाडा भारत
ईरान अफगानिस्तान पाक की पूछो ही मत
आतंक अफीम की है जिन्हें लत!
हिंसा के ये हिमायती
जान जहाँ है किफायती
पलक झपकते ही सब हो जाता खाक
इरादे इनके सदैव नापाक
गोली बंदूक निकले बात बात
मिटती जा रही है मनुष्य की जात
कौन सिखाएगा इन्हें?
अब मानवता का पाठ
चेते नहीं जो खुद से
तो होगा सर्वनाश!

 

लेखकमो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

यह भी पढ़ें:-

चौबीस से पहले | 2024 se Pahle

 

 

Similar Posts

  • प्रकृति का मानवीकरण

    प्रकृति का मानवीकरण प्रकृति की गोद में हम रहते हैं,उसकी सुंदरता से हमें प्रेरणा मिलती है,की उसकी शक्ति से हमें जीवन मिलता है। प्रकृति की हरियाली में हम खो जाते हैं,उसकी ध्वनियों में हमें शांति मिलती है,की उसकी सुंदरता में हमें आनंद मिलता है। प्रकृति की शक्ति से हमें प्रेरणा मिलती है,उसकी सुंदरता से हमें…

  • स्वर्ण मंदिर है गुरु का द्वार | Swarn Mandir

    स्वर्ण मंदिर है गुरु का द्वार ( Swarn mandir hai guru ka dwar )    जिसको सारा विश्व जानता स्वर्ण मंदिर के नाम, श्री हरिमन्दिर श्री दरबार साहिब इसी का नाम। सिक्ख आस्था का है यह सर्वाधिक पवित्र धाम, करोड़ों श्रद्धालु देखने को आते जिसका काम।। सिक्ख धर्म में आध्यात्मिक-प्रतिष्ठित यह स्थान, पवित्र-कुंड के नीर…

  • विजय संकल्प

    विजय संकल्प     हार माने हार होत है जीत माने जीत, जीतने वाले के संग सब लोग लगावत प्रीत।   मन कचोटता रह जाता जब होता है हार, मन ही बढ़ाता है मनोबल जीवन सीख का सार।   जीत-हार का जीवन चक्र सदैव चलता रहता है, जीत-हार उसी की होती है जो खेल खेलता…

  • शहर रात भर रोता रहा | Kavita shahar raat bhar rota raha

    शहर रात भर रोता रहा ( Shahar raat bhar rota raha )    त्रासदी ने झकझोर दिया भारी नुकसान होता रहा त्राहि त्राहि कर उठा हृदय शहर रात भर रोता रहा   जाने किसकी नजर लगी क्या अनहोनी आन पड़ी खुशियां सारी खफा हो गई जिंदगियां बेजान खड़ी   कुदरत का कोई कहर था कितना…

  • उठो पार्थ | Kavita utho parth

    उठो पार्थ (  Utho parth )     उठो पार्थ प्रत्यंचा कसो महासमर में कूद पड़ो। सारथी केशव तुम्हारे तुम तो केवल युद्ध लड़ो।   धर्म युद्ध है धर्मराज युधिष्ठिर से यहां महारथी महाभारत बिगुल बजाओ उद्धत होकर हे रथी।   कर्ण भीष्म पितामह से महायोद्धा है सारे भारी। धनंजय धनुष बाण लेकर करो युद्ध…

  • मेरे जीवन में ये शिक्षक | Kavita on Teacher

    मेरे जीवन में ये शिक्षक ( Mere jeevan mein ye shikshak )    दीपक की ज्योति बना, अंधकार में रोशनी बना, मार्ग का मार्गदर्शन दिया, बुद्धि का जिसने विकास किया, कलम से जिसने लिखना सिखाया, शब्दों का सही अर्थ बतलाया, टूटे धागों से माला के मोती पिरोना, मुश्किलों में भी धैर्य नहीं खोना, खुद पर…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *