Chaubis se Pahle

चौबीस से पहले | 2024 se Pahle

चौबीस से पहले

( Chaubis se pahle )

 

न जाने कितने बनेगे मणीपुर?
बंगाल बिहार राजस्थान मध्यप्रदेश
छत्तीसगढ़ भी!
मेवात नोएडा नूह
बनेगे नये समूह…
होने जो हैं चुनाव
कुछ सूबों और केन्द्र के
बचे हैं दिन मुश्किल के
तैयारियां तो करनी पड़ेगी ना
लड़ाओ बांटो उलझाओ
समस्याओं को ना सुलझाओ
बढ़ने दो यूँ ही,मर मिटने तक
तार तार रिश्ते होने तक
लोकतंत्र मिंस औरों से एक अधिक पाना
फिर विरोधियों को शिद्दत से दबाना
ईडी सीबीआई आईटी रेड डलवाना
विरोधियों को खाक में मिलाना
फिर एकछत्र राज पाकर
शासन का मजा उठाना
मीडिया को गोद में बिठाकर
मुंह में लालीपॉप थमाना
अपने मन मुताबिक एजेण्डा चलाना
फिर जनता को मन भर निचोड़ो
विकास ऊकास की बात छोड़ो
बैठे बैठे स्वीस बैंक से नाता जोड़ो
और जोर से नारा लगाओ
जय श्री राम.. राम.. राम
वीर हनुमान!
जनता खुश और हम भी?

 

लेखकमो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

यह भी पढ़ें:-

बचा लो सृष्टि भगवान | Bachalo Srishti Bhagwan

 

 

Similar Posts

  • प्रश्नों के घेरे में | Prashno ke Ghere Mein

    प्रश्नों के घेरे में ( Prashno ke Ghere Mein )   हम खड़े हैं प्रश्नों के घेरे में  उत्तर की प्रतीक्षा लिए कुछ के लापता है कुछ अस्पष्ट कुछ संदिग्ध हैं कुछ खामोश  कुछ गर्भ में हैं कुछ मर्म में  कुछ के उत्तर होकर भी वह उत्तर नहीं है  प्रश्न भी कुछ सार्थक हैं कुछ निरर्थक…

  • वो सुहाने पल | Kavita Wo Suhane Pal

    वो सुहाने पल ( Wo Suhane Pal ) याद आते खूब हमको वो सुहाने पल। बैठ पिता के कंधों पर करते हलचल। अठखेलियां आंगन में हंसते मुस्काते। दादा दादी भी घर में फूले नहीं समाते। आस पड़ौस में आना जाना भाता था। खेल खेलने हुजुम बड़ा जम जाता था। बाजारों में रौनक होती चौपालों पर…

  • आजादी के शहजादे | Poem in Hindi on Bhagat Singh

    आजादी के शहजादे ( Azadi ke shahzade )    अठाईस सितंबर धन्य हुआ,तेईस मार्च की स्तुति में अठाईस सितंबर उन्नीस सौ सात, शहीदे आजम हिंद अवतरण । रज रज अति उमंग उल्लास, सर्वत्र अप्रतिम खुशियां संचरण । फिरंगी सिंहासन हिला डाला, प्रतिभाग कर क्रांतिकारी युक्ति में । अठाईस सितंबर धन्य हुआ, तेईस मार्च की स्तुति…

  • सुभाष चंद्र बोस : Poem on Subhash Chandra Bose

    सुभाष चंद्र बोस शायद सदियों में होती हैंपूरी एक तलाश,शायद विश्वासों को होतातब जाकर विश्वास। शायद होते आज वो जिंदाभारत यूं ना होता,शायद दुश्मन फूट-फूट करखून के आँसू रोता। आजादी की भेंट चढ़ गयेहुआ अमर बलिदान,श्रद्धा पूर्वक नमन आपकोहे वीरों की शान। मोल असल इस आजादी कीआपने हीं समझाया,दिया जवाब हर इक ईंटों कापत्थर बन…

  • स्वर्ग | Swarg par Kavita

    स्वर्ग  ( Swarg )    स्वर्ग   कहीं   ना   और,  बसा  खुद  के  अंतर में खोज   रहे  दिन- रात  जिसे  हम  उस  अम्बर में   सुख   ही   है   वह   स्वर्ग  जिसे  हम  ढूंढे  ऊपर बसा    हमारे    सुंदर   तन – मन   के   ही  अंदर   काट    छांट    कर    मूर्तिकार   जैसे   पत्थर को दे    देता    है   रूप   अलग  …

  • अपनापन | Kavita Apnapan

    अपनापन ( Apnapan ) सफर करते-करते कभी थकती नहीं, रिश्ता निभाने का रस्म कभी भूलती नहीं, कभी यहाँ कभी वहाँ आनातुर, कभी मूर्खता कभी लगता चातुर्य, समझ से परे समझ है टनाटन, हर हालत में निभाते अपनापन, किसी को नहीं मोहलत रिश्तों के लिए, कोई जान दे दिया फरिश्तों के लिए, कोई खुशी से मिला,कोई…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *