Jeevan Thoda hi Sahi

जीवन थोड़ा ही सही | Jeevan Thoda hi Sahi

जीवन थोड़ा ही सही

( Jeevan thoda hi sahi )

 

जीवन थोड़ा ही सही लेकिन महान होना चाहिए,
ख़ुद को बेहतर बनाने हेतु लड़ाई लड़नी चाहिए।
पाखण्ड अन्धविश्वास को अब त्याग देना चाहिए,
पथ मुसीबतों का हो चाहें घबराना नही चाहिए।।

समय रहते अपने आपको बदल ही लेना चाहिए,
मानव है हम मानव-धर्मों को भूलना ना चाहिए।
ज़रुरत पड़े तो सेवक बनकर सेवाएं देनी चाहिए,
कभी किसी का कैसा अहित करना ना चाहिए।।

नफरत की इन दीवारों को अब तोड़ देना चाहिए,
ये रिश्ते बनाएं रखने खातिर झुक जाना चाहिए।
अच्छे अच्छे काज करके पहचान बढ़ानी चाहिए,
प्रेम की अनुपम रंगोली सबको सजानी चाहिए।।

यह धैर्य एवं संतोष हमेशा सबको रखना चाहिए,
पुरखों की ये अमानते संभालकर रखनी चाहिए।
काम-क्रोध मद मोह व लोभ से दूर रहना चाहिए,
स्वयं अपने आपकी तारीफ़ नही करनी चाहिए।।

जीवन में नेक काज लगातार करते रहना चाहिए,
विश्वास न हो तो आजमा-कर देख लेना चाहिए।
कर्मो से महामानव बनें है इतिहास पढ़ना चाहिए,
अपने ‌भले हेतु कोई दूजे को सताना न चाहिए।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

Similar Posts

  • शिक्षक देव | Shikshak dev

    शिक्षक देव ( Shikshak dev )    शिक्षक ही है श्रोत ज्ञान का अनवरत दे रहा ज्ञान का दान बिना ज्ञान है व्यर्थ यह जीवन है यही जग मे कर्तव्य महान.. नासमझ से समझदार बनाकर शिक्षक अपना कर्तव्य निभाता आया आदर,सत्कार,सत्य,अहिंसा का भेद सदा सबको बतलाता आया…. देकर अल्प समय में ही सीख वह जीवन…

  • देशभक्त है हम भारत के | Desh Bhakt hai Hum Bharat ke

    देशभक्त है हम भारत के ( Desh bhakt hai hum bharat ke )    हिम्मत व हौंसला रखतें है हम भारतीय नौजवान, इसी का नाम है ज़िन्दगी चलते-रहते वीर जवान। निराशा की कभी ना सोचते और नहीं खोते आस, सिर‌ ऊपर पानी बह जाएं चलते रहते सीना तान।। धरा को माता कहते है हम पिता…

  • आखिरी दौर | Aakhri Daur

    आखिरी दौर ( Aakhri daur )   आखिरी दौर है जीवन का क्यों न हम याद कर लें अपने किए कर्मों को, इसी आखिरी दौर में याद आता है सारे अच्छे,बुरे कर्म, हम भूल नही पाते हैं सारे मर्मों को। कौन कहता है कि हम भूल जाते हैं अपने सारे किए कर्म गलत या सही,…

  • सोच रहा बैठा एकाकी | Kavita Soach Raha

    सोच रहा बैठा एकाकी (  Soach Raha Baitha Ekaki ) बहुत अकेलापन लगता है जनसंकुल संसार में। जन्मान्तर का ऋणी, गई है पूंजी सभी उधार में। सोच रहा बैठा एकाकी, अभी और है कितना बाकी। रिक्त हस्त कैसे चुकताऊं, मेरे नाम लगी जो बाकी। शिथिल अंग हो रहे करूं क्या मैं इसके प्रतिकार में। कालधार…

  • ट्रैफ़िक जाम | Traffic Jam

    ट्रैफ़िक जाम ( Traffic Jam )   जब सड़कें नहीं चलती तब गलियाँ चलती हैं, जब गलियाँ भी नहीं चलती, तब लोग पैदल चलने लगते हैं। पैदल चलना केवल स्वास्थ्यकर ही नहीं होता बल्कि क्रांति का द्योतक होता है उस व्यवस्था के विरुद्ध जो सड़कें, गलियां जाम करने को मजबूर करते हैं, तब पैदल चलने…

  • मां कूष्मांडा | Maa Kushmanda

    मां कूष्मांडा ( Maa Kushmanda ) चौथे दिन नवरात्रि के, जिनकी की जाती उपासना,पूजा की जाती विधान से, कहलाती वो मां कूष्मांडा। ब्रह्मांड की रचियता मां, सृष्टि की आदिस्वरूप, आदिशक्ति,सूर्यमंडल के भीतर लोक, निवास करे मेरी महामाई। शरीर की कांति और प्रभा, सूर्य भांति ही दैदीप्यमान,दसों दिशाएं प्रकाशित होती, मां का भव्य तेज, प्रकाश। अष्टभुजी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *