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मनोज की शादी

राम अवतार जी एक कॉलेज में चपरासी के पद पर कार्यरत थे। वे प्रातः 4 बजे उठकर दैनिक क्रियाकलापों से निवृत होकर, नहा धोकर, साइकिल से 2 किलोमीटर दूर नियमित महादेव जी के मंदिर पर जल चढ़ाने जाते थे।

भगवान की पूजा-अर्चना करके माथे पर एक बड़ा सा पीला-लाल रंग का टीका लगाते थे और उसी टीके के साथ पूरे दिन गुजार देते थे। टीका लगा होने के कारण हर कोई उन्हें पंडित समझता था। जबकि वे जाति से कुछ और थे। पढ़े लिखे ना होने के बावजूद वे अपने पहनावे और बातचीत से शिक्षित नजर आते थे।

उनसे कोई भी बात, कभी भी पूछ लो… हर बात, हर घटना उन्हें याद रहती थी। हर घटना को वे विस्तृत तरीके से दिन, तारीख व समय बताते हुए बताते थे। हर कोई उनके बात करने के तरीके से बहुत प्रभावित होता था। यहां तक कि मैं भी उनके बात करने के तरीके और उनकी दिनचर्या से बहुत प्रभावित था।

पढ़े-लिखे व्यक्ति भी अपनी बात को इतनी अच्छी तरह नहीं रख पाते थे, जितनी अच्छी तरह से वे रखते थे। देखने में वे स्वस्थ नजर आते थे। उनकी दो बेटियां और एक बेटा था। बड़ी बेटी का नाम चांदनी, फिर बेटा मनोज और सबसे छोटी थी गुड़िया। चांदनी की शादी हो चुकी थी। अब बारी मनोज की थी।

मनोज की शादी तय हो चुकी थी। शादी चार दिन बाद होनी थी। राम अवतार जी और मनोज कार्ड बांटने में व्यस्त थे। मुझे भी मनोज की शादी का कार्ड मिला। मनोज मेरा हमउम्र था।

पेशे से वकील था। राम अवतार जी से पारिवारिक संबंध होने के कारण मैं भी उसकी शादी में शरीक होने का इच्छुक था। मनोज का लग्न-रिश्ता कार्यक्रम व शादी, दोनों एक ही दिन होने थे। दिन में लग्न-रिश्ता कार्यक्रम होना था और रात को शादी शहर के ही एक होटल में होनी थी।

राम अवतार जी चार भाइयों में सबसे छोटे थे। देव योग से उसी दिन सुबह के समय राम अवतार जी के सबसे बड़े भाई कृष्ण अवतार जी की आकस्मिक मृत्यु हो गई। कृष्ण अवतार जी, राम अवतार जी के घर से 2 किलोमीटर की दूरी पर रहते थे। कृष्ण अवतार जी की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी।

वे फलों का ठेला लगाते थे। राम अवतार की अपने बड़े भाई से ज्यादा बनती नहीं थी। उनका अपने भाइयों के यहाँ आना जाना कम ही था। उनमें वैचारिक मतभेद थे, लेकिन एक ही परिवार के होने के नाते दावत का न्योता सभी रिश्तेदारों को दिया गया था। कृष्ण अवतार का परिवार भी सादर आमंत्रित था, लेकिन अचानक कृष्ण अवतार की मौत से पारिवारिक हालात बदल गए।

खुशी, दुख में… विलाप में बदल गई। मनोज की शादी के मद्देनजर बहुत सारे रिश्तेदार (जोकि कृष्ण अवतार व राम अवतार दोनों के ही खास थे, परिवार के थे) एक दिन पहले ही राम अवतार जी के यहां इकट्ठा हो गए थे, लेकिन अचानक कृष्ण अवतार की मौत सुनकर वे सब अंतिम संस्कार में जाने की तैयारी करने लगे।

कृष्ण अवतार की अंतिम यात्रा में शामिल होना प्राथमिक कार्य था। रिश्तेदारों ने राम अवतार जी से भी कृष्ण अवतार जी के अंतिम दर्शन करने और साथ चलने का आग्रह किया, लेकिन राम अवतार ने स्पष्ट मना कर दिया कि वे वहां नहीं जाएंगे। यहीं रहकर मनोज के ससुराल पक्ष के लोगों के सम्मान हेतु लग्न रिश्ते की तैयारी की व्यवस्था करेंगे।

हद तो तब हो गई जब उनकी बेटी चांदनी ने स्पष्ट शब्दों में… शादी में आए अपने रिश्तेदारों को, कृष्ण अवतार की अंतिम यात्रा में जाने से रोकते हुए कहा- “जो भी ताऊजी की अंतिम यात्रा में जाएगा, उसको पुनः यहाँ वापस आने की कोई जरूरत नहीं है। मेरे भाई की शादी है, शुभ बेला है।

इस शुभ बेला में मैं किसी अशुभ काम को करके आए लोगों की छाया, कुदृष्टि बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करूंगी। जाने से पहले सोच लो। अगर यहां से गए, तो मेरे भाई के लग्न-रिश्ते कार्यक्रम और शादी में आने की कोई जरूरत नहीं है। मैं किसी को भी अपने भाई के शुभ कार्यक्रम में घुसने ना दूंगी।”

राम अवतार जी बेटी के इस बयान पर खामोश थे। उनकी खामोशी बेटी के इस बयान को मौन स्वीकृति दे रही थी। सभी करीबी रिश्तेदारों को राम अवतार और उनकी बेटी की यह बात बिल्कुल अच्छी ना लगी। सब सोचने लगे- “कैसा भाई है? पिता तुल्य भाई के प्रति रत्तीभर प्रेम नजर नहीं आ रहा?

उनके लिये मनोज के ससुराल पक्ष के लोग ही सब कुछ हो गए। सगे भाई या खून के संबंधों का कोई मोल नहीं? उनकी कुछ भी वैल्यू नहीं है। मौत की खबर सुनकर तो दुश्मन भी चला आता है, सारी बातें भूल जाता है… और ये दुष्ट लोग खुद तो भाई के अंतिम संस्कार में जाने से रहे, हमें भी जाने से रोक रहे हैं।

फिर से वापस न आने की धमकी तक दे रहे हैं। यह गलत है। इसका विरोध होना चाहिए। ऐसे भाई के होने से तो बिना भाई के होना अच्छा है। हमें इस बदतमीज इंसान और इस बदतमीज परिवार के बच्चों को सबक सिखाना पड़ेगा।”

यह सोचकर राम अवतार के खास रिश्तेदारों (सगे भाई-बहनों, चचेरे-तहेरे भाई-बहनों और उनके सभी बच्चों ने) ने मनोज के लग्न रिश्ते कार्यक्रम और शादी में शामिल न होने का निर्णय लिया। जिसने भी राम अवतार की इस घटिया सोच के बारे में सुना, उन्हें यह पता चला कि राम अवतार के परिवार से कोई भी कृष्ण अवतार जी के क्रियाकर्म में शामिल न हुआ तो… उसने मनोज की शादी में जाने से परहेज किया।

मनोज की शादी में परिवार के बहुत कम सदस्य ही शामिल हो सके। अधिकांश परिवार के सदस्यों ने राम अवतार से अपने संबंध विच्छेद कर लिए थे। उन्होंने राम अवतार की घटिया सोच और मानसिकता की कड़ी आलोचना की।

और उनके परिवार का बहिष्कार कर दिया। मैं किन्हीं कारणवश मनोज की शादी में शामिल न हो सका था। कुछ दिनों बाद मुझे इस घटना के बारे में पता चला। मैं राम अवतार को अच्छा, नेक, भला, व ईश्वर को मानने वाला इंसान समझता था, लेकिन उनकी घटिया सोच ने मेरी नजर में उनकी वैल्यू खत्म कर दी थी।

मनोज की शादी में जो कुछ भी हुआ, उसकी हाय कुछ समय बाद, राम अवतार के परिवार पर पड़ गई। बेटे मनोज की शादी के 3 माह बाद ही बेटी चांदनी के पति की तीव्र ज्वर के चलते अचानक मृत्यु हो गई। वह विधवा हो गई। उसके ससुराल वालों ने उसे घर से बाहर निकाल दिया।

वह मायके आकर रहने लगी। मनोज की घरवाली ने मनोज व उसके परिवार पर हिंसा करने, दहेज हेतु प्रताड़ित करने का मुकदमा दर्ज करवा दिया और अपना सब सामान लेकर मायके चली गई। लगभग 6 साल तक लंबे चले मुकदमे के बाद उनका तलाक हो सका।

फिलहाल अभी तक मनोज की दूसरी शादी न हो पाई है। राम अवतार की सबसे छोटी बिटिया गुड़िया भी अभी तक कुँवारी है। उसकी उम्र भी लगभग 35 वर्ष हो गई है। उनकी बिरादरी का कोई भी परिवार उनके मनोज व गुड़िया को अपनाने को तैयार नहीं है क्योंकि जिसकी नजर में अपने परिवार के सदस्यों की कोई वैल्यू नहीं है, जिन्हें सिर्फ अपना निजी स्वार्थी नजर आता है… उस परिवार में शादी करने से क्या फायदा? राम अवतार की समाज में, आस पड़ोस में आज की तारीख में कोई इज्जत नहीं है।

कोई भी उनको अपने शुभ कारज में बुलाना पसंद नहीं करता। उनके एक निर्णय ने (भाई के अंतिम संस्कार, क्रियाकर्म को तवज्जो ना देकर, मनोज के ससुरालयों को प्राथमिकता देने ने) उन्हें कहीं का ना छोड़ा। मृतक परिवार व रिश्तेदारों की हाय ने राम अवतार के परिवार का सुख, चैन, शांति सब कुछ छीन लिया।

लेखक:- डॉ० भूपेंद्र सिंह, अमरोहा

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