Kahin kisi roz

कहीं किसी रोज | Kahin kisi roz | Kavita

कहीं किसी रोज

( Kahin kisi roz )

 

आओ हम चले कहीं मिले कभी किसी रोज।
महफिल जमाकर बैठे मौज से करेंगे भोज।

पिकनिक भ्रमण करें घूमे हसी वादियो में।
झूमे नाचे गाए हम जा बेगानी शादियों में।

सैर सपाटा मौज मस्ती आनंद के पल जीये।
खुशियों के मोती वांटे जीवन का रस पीये।

कहीं किसी रोज हम काम ऐसा कर जाए।
दुनिया याद करें हमें बुलंदियों को हम पाए।

प्रीत के तराने छेड़े गीत गाए बहार के।
दिलों में उमंगे उमड़े बोल मीठे प्यार के।

दिल में बसा सके हम वो किरदार निभाएंगे।
आसमा की बातें छोड़ो दिलों पे छा जाएंगे।

शब्द सुधारस घोलकर सबको पिलाएंगे।
हम भी अपनी मस्ती में झूम झूम गाएंगे।

 ?

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

साळी दैव ओळमो | Marwadi sahitya

Similar Posts

  • देवा श्री गणेशा | Deva Shree Ganesha

    देवा श्री गणेशा ( Deva shree ganesha )    रिद्धि सिद्धि के दाता सब विध्नहर्ता, सब कार्यों में प्रथम पूज्य शुभारंभ कर्ता। देवा श्री गणेशा……. सबसे निराले और विलक्षण रूप धारी, शुभ और लाभ दाता हैं मंगल कारी। देवा श्री गणेशा…… इनकी पूजा बिना न कोई काम होवे, इनको है भाते मावा, लड्डू और खोवे।…

  • गणपत लाल उदय की कविताएं | Ganpat Lal Uday Poetry

    मां नील सरस्वती का प्रतीक बहुत निराली और रहस्यमयी है जिसकी ये कहानी,समुद्र मंथन से प्रकट हुआ सुना बुजुर्गो की ज़ुबानी।उन 14 रत्नों में से एक है ऐसा कहते समस्त ज्ञानी,हरसिंगार पारिजात शेफाली कहते कोई रातरानी।। कल्पवृक्ष भी कहते इसको जो रोपा गया इन्द्रलोक,संपूर्ण रात सुगंध बिखेरता फूल जिसका इन्द्रलोक।आमतौर पर यह देर शाम अथवा…

  • बनारस | Banaras par Kavita

    बनारस ( Banaras )   (भाग -1)   भोले का दरबार बनारस, जीवन का है सार बनारस। विश्व मशहूर सुबह-ए-बनारस, देखो अस्सी घाट बनारस। संस्कृति का श्रृंगार बनारस, मुक्ति का है द्वार बनारस। होता है अध्यात्म का दर्शन, भक्ति का संसार बनारस। प्रथम सभ्यता का उद्गम, तीर्थों का है तीर्थ बनारस। है त्रिशूल पे टिकी काशी,…

  • धोनी का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास | Dhoni par kavita

    धोनी का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ( Dhoni ka antarrashtriya cricket se sanyas)   धोनी ने लिया अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास देख सुनकर फैन्स हो गए उदास । एक विकेट कीपर बल्लेबाज, जिस पर पूरे विश्व को है नाज। अब उसे मैदान पर खोजेंगी निगाहें, न मिलने पर भरेंगी आहें। भारतीय क्रिकेट में तो एक…

  • नरेन्द्र सोनकर की कविताएँ | Narendra Sonkar Poetry

    रोटी बड़ी या देश बड़ा? संसद गूंगीसांसद गूंगान्यायालय गूंगान्यायाधीश गूंगासत्ता गूंगीशासन गूंगादल-दल गूंगागण-गण गूंगाबस्ती गूंगीघर-घर गूंगाजन-जन गूंगाकण-कण गूंगाधरम-करम का परचम गूंगापढ़ें-लिखें का दमखम गूंगाइस देश का सिस्टम गूंगा अशिक्षा का ग्राफ न पूछो?महंगाई की भाप न पूछो?बेरोज़गारी ज़िंदा डसतीछात्र लटकते हैं फांसी परहताशा, निराशा इतनी खून, मांस, लोग बेचें किडनी! नगर-सिटी क्या,बस्ती क्या,लोग भटकते दर-बदररोटी…

  • ज़िंदगी

    ज़िंदगी तेरे बिना ये साँझ भी वीरान लगी,हर सुबह भी अब तो अनजान लगी,मैं मुस्कराया पर दिल रो दिया,दिकु, तूने इतनी गहराई से क्यों प्रेम किया? तन्हा हुआ तो वक़्त भी थम गया,हर रास्ता जैसे मुझसे छिन गया,जब तू थी, हर मोड़ पे तूने हौंसला दिया,दिकु, तूने इतनी गहराई से क्यों प्रेम किया? बातें अधूरी,…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *