Marwadi sahitya

साळी दैव ओळमो | Marwadi sahitya

साळी दैव ओळमो

 

कदे जलेबी ल्यायो ना
हंस हंस क बतलायो ना
वार त्योहारां आयो ना
हेतु घणों बरसायो ना

 

मैळो कदे दिखायो ना
गाड़ी म घुमायो ना
घूमर घालैण आयो ना
गीत सुरीला गायों ना

 

साळी बोली हां र जीजा
आव ओळमो तन दयू
जीजी रा भरतार बता दें
क्यां पै जीजोजी कह दयूं

 

कलडो होयां कयां चालै
क्यूं तैवर दिखळावै है
झाला दैव बैठ साळियां
जीजा क्यूं शरमावै है

 

बढ़ ठण होरयो छेल छबीलो
जीजा के मंगवावे है
अंटी ढीली कर ले थोड़ी
सासरिये जद आवै है

 

साळी बोली हां र जीजा
आव ओळमो तन दयू
जीजी रा भरतार बता दें
क्यां प जीजोजी कह दयूं

 

 ?

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

म्हारो गांव अलबेलो | Marwadi poem

Similar Posts

  • याद न आये, बीते दिनों की

    याद न आये, बीते दिनों की बैठी हूँ नील अम्बर के तलेअपनी स्मृतियों की चादर को ओढेजैसे हरी-भरी वादियों के नीचेएक मनमोहक घटा छा जाती हैमन में एक लहर-सी उठ जाती है।जैसे कोई नर्म घास के बिछौनों परकोई मन्द पवन गुजर जाती हैदेखकर प्रकृति नटी के इस रूप मेंबचपन में की गई शरारतेंफिर से आंखों…

  • वसंत ऋतु पर कविता | Hindi Poem Basant

    वसंत ऋतु पर कविता उड़ा जाये पीत पात पछुआ पवन में। आग लगी हुई है पलाश वन में। सेमल की डाली से बोल रहा मोर। पाकर के कोटर से झांके कठफोर। जाने क्या सोच रही गिलहरिया मन में। आग लगी हुई है पलाश वन में। कोयलिया देख गई आज भिनसारे, डालों में टांग दिये किसने…

  • नव-सभ्यता | Kavita Nav Sabhyata

    नव-सभ्यता ( Nav Sabhyata ) नव सभ्यता की मजार में फटी चादर का रिवाज है आदिम जीवन की आवृत्ति में शरमों -हया की हत्या है प्रेम-भाव के विलोपन में तांडव का नर्तन है मशीनी मानव की खोज में मां-बेटियां नीलाम है हाय-हेलो की संस्कृति में सनातन हमारी श्मशान है पछुयायी की नशे में मिजाज हमारा…

  • रामदुलारे | Ram Dulare

    रामदुलारे ( Ramdulare )    घट घट में श्री राम बिराजे रोम रोम श्रीराम है। राम सेवा में आतुर रहते रामभक्त हनुमान है। रामदुलारे अंजनी लाला पवन पुत्र हनुमान है। सीना चीर दिखा सकते राम-राम में ध्यान है। आराध्य श्रीराम प्रभु है जग के पालनहार है। ध्यान लगा लो श्रीराम का सृष्टि के करतार है।…

  • देश हमारा | Desh Hamara

    देश हमारा ( Desh Hamara )    वीरों की पावन भूमि है देश हमारा । पृथ्वी पे सबसे प्यारी जमीं है देश हमारा ।। संसाधनों से भरा-पूरा है देश हमारा । प्राकृतिक सौंदर्य से भरा है देश हमारा ।। अनेकता में एकता लिए है देश हमारा । अनेक कलाओं का संग्रह है देश हमारा ।।…

  • पहचान | Kavita

    पहचान ( Pehchan )   प्रेम के मोती लुटाओ प्रतिभा कोई दिखाओ पहचान  जग  में  कोई  नई  बनाईए सफलता मिल सके पर्वत भी हिंल सके जंग  भरी  दुनिया  में  हौसला  बनाइए लगन से मेहनत रंग जरूर लाएगी पहचान जग में आप ऐसी बनाईए पूर्वजों की साख में चार चांद लग जाए कर्म  पथ  पर  अपनी …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *