Kamakhya Devi par Kavita

माँ कामाख्या देवी | Kamakhya Devi par Kavita

माँ कामाख्या देवी

( Maa Kamakhya Devi ) 

 

जो भी मां के द्वारे जाते वो खाली कोई ना आते,
झोली सभी की भर देती है वह कामाख्या माते।
एक-बार जाकर तो देखो तुम मैया रानी के द्वारें,
दुःख एवं कष्ट सारे हर लेती वो कामाख्या माते।।

५१ शक्तिपीठों में से एक प्रसिद्ध यह शक्तिपीठ,
अघोरियों तांत्रिकों का गढ़ माना जाता यें पीठ।
असम राजधानी दिसपुर में इसका मंदिर स्थित,
ये कामाख्या मंदिर है शक्तिपीठों का महापीठ।।

दूर-दूर से आते यात्री वो जयकारे लगाते लगाते,
कई करते ये भंडारे और कई लगाते है जगराते।
भक्ति भाव से नंगे पैर कोई तीर्थ यात्रा को आतें,
कई भक्त पंडाल लगाकर भोजन प्रसाद कराते।।

करिश्मा है अथवा जादू या माता का आशीर्वाद,
निर्धन को धन मिलता है बेऔलाद को औलाद।
स्वार्थी एवं छल-कपटी लोग सदा होते है बर्बाद,
शाम-सवेरे गूंजता है इस मन्दिर में ये शंखनाद।।

न कोई फोटो न मूर्ति बस एक बड़ा सा है कुण्ड,
जो सदैव ढ़का रहता है इन प्यारे फूलों के झुंड।
इस मन्दिर में होती है देवी माता योनि की पूजा,
जिस भाग के यहां होने से होता रजस्वला कुंड।।

इस मंदिर के बारे में मिलेगी धर्म पुराणों में बातें,
इन ख़ास उत्सवों पर लोग कई तादात में जातें।
दुर्गापूजा मनासा पूजा मदानदेऊल वसंती पूजा,
अंबुवासी पोहानबिया दुर्गादेऊल में मन्नत पाते।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

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