Kavita Aaj Bhi Betiyan

आज भी बेटियाँ | Kavita Aaj Bhi Betiyan

आज भी बेटियाँ

( Aaj Bhi Betiyan )

 

सिल बट्टा घिसती है,
खुद उसमे पिसती है,
बूँद बूँद सी रिसती है,
मगर फिर भी हँसती,
आज भी बेटियाँ गाँव शहर में….!!

नाज़ो से पलती है,
चूल्हे में जलती है,
मनचाही ढलती है,
फिर भी ये खलती है,
आज भी बेटियाँ गाँव शहर में ….!!

कच्ची नींद सोती है,
परिवार को ढोती है,
चुप छुप वो रोती है,
फिर भी खुशी बोती है,
आज भी बेटियाँ गाँव शहर में …!!

घर छोड़ वो आती है,
घर दूजा बसाती है,
हक पूरा न पाती है,
फिर भी न जताती है,
आज भी बेटियाँ गाँव शहर में ….!!

मात की जिगर जान है
पिता की रही शान है
हर इक घर की आन है
फिर भी ये परेशान है,
आज भी बेटियाँ गाँव शहर में ….!!

DK Nivatiya

डी के निवातिया

यह भी पढ़ें:-

मन की डायरी | Kavita Man ki Diary

Similar Posts

  • दिव्य भूमि | Kavita divya bhumi

    1.दिव्य भूमि   दिव्य भूमि साकेत जहाँ पर, राम ने जन्म लिया था। कलयुग में वो भाग्य पे अपने, जार जार रोया था।   सृष्टि के साथ ही उदित हुआ,उस नगर का नाम था काशी। नराधमों ने काशी की महिमा को बना दिया दासी।   नाम बदल दी धर्म बदल दी, इतिहास मिटा दी सारी।…

  • Hindi Poetry On Life | Hindi Poem -पहेली

    पहेली ( Paheli)   जय विजय के बीच मे लो, मै पराजित हो गया। सामने मंजिल थी मेरी , पर मै थक के सो गया।   अपनो पे विश्वास कर मै खुद ही खुद से ठग गया। आँख जब मेरी खुली तब तक, लवारिस हो गया।   छोड करके जा चुके थे जो मेरे अपने…

  • आम | Aam kavita

    आम ( Aam )   खाओ ताजा-ताजा आम कहते फलों का राजा आम। कुछ कच्चा कुछ पक्का आम कुछ खट्टा कुछ मीठा आम।। बागों में जब बौरे आम कोयल बोले सुबह और शाम । देख टिकोरा तोड़े छोरा भूल के घर का सारा काम।। लंगड़ा चौसा और दशहरी ना जाने हैं कितने नाम । बने…

  • रंगोली | Rangoli

    रंगोली ( Rangoli )   रंगहीन सी जिंदगी में वो किसी रंगोली से कम नहीं। उदासियों के भंवर में इक मीठी बोली से कम नहीं। बदलाव की बयार लेकर आयी है वो मेरी जिंदगी में। प्यार लुटाती सदा, वो किसी हमजोली से कम नहीं। रंगहीन सी जिंदगी में वो किसी रंगोली से कम नहीं। श्वेत-श्याम…

  • शोहरतों का परचम | Poem shohraton ka parcham

    शोहरतों का परचम ( Shohraton ka parcham )   कीर्ति पताका यशस्वी हो जीवन संवार लीजिए। अपनापन अनमोल बांटकर सबको प्यार कीजिए।   शोहरतों का परचम लहरे शुभ काम हमारा हो। मुस्कानों के मोती सबको बहती नेह की धारा हो।   प्रीत बगिया खिल जाए सद्भावों से जी लीजिए। दिलों में चर्चा आपकी अहमियत सबको…

  • सुमा मण्डल की कविताएं | Suma Mandal Poetry

    हमें संग ले जाइए आपसे दूर और रहा न जाए।दर्द कितना होवे कहा न जाए।हे दयासागर! आ जाइए।हमको सदा के लिए संग ले जाइए।। श्री चरणों से दूर प्रयोजन नहीं कहीं हमारा।निष्प्राण देह यह विरह का मारा।परमानंद की ज्योति जगाइए।हे दयासागर! आ जाइए।हमको सदा के लिए संग ले जाइए ।। कितनी बहाएंगी और आंसू अंखियां।ताना…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *