पर्यावरण संरक्षण | विश्व पर्यावरण दिवस विशेष

पर्यावरण संरक्षण

पर्यावरण संरक्षण,आज जरूरी
प्रकृति,पर्यावरण सखा हमारी,
छेड़-छाड़ लाएगा, विभीषिका,
कोरोना काल है दृष्टांत,भयंकर।।।

वन,जंगल,वृक्ष,बगीचा,हितैषी,
फल-फूल,इंधन,डालपात,ऋषि
संजीवनी बुटी,औषधी, भंडार,
पर्यावरण से मिले,सुकून,उपहार।।।

पीपल,बरगद,तुलसी,मूल्यवान,
जरा,आधि,व्याधि,निजात धन
वातावरण रहे ठंडा,उर्जावान,
पथिक को मिले हवा,छाया,रमण।।

वृक्ष सहायक लाने मानसून,राम
कटाई से जलसंकट का ख़तरा,
जन-जीवन के आगे चुनौती,
व्यष्टि नहीं समष्टि से,निदान।।।

शहरीकरण से इजाफ़ा,उद्योग,
प्रदूषण बढ़ता,सांस में घुटन,
महंगाई का परोक्ष कारण,अरू
ग्लोबल वार्मिंग का भी कारण।।।

Aruna

श्रीमती अरुणा अग्रवाल
लोरमी, जिला मुंगेली, छ. ग.

यह भी पढ़ें :-

उमंग | Kavita Umang

Similar Posts

  • श्रीमती उमेश नाग की कविताएं

    सुनो है‌! मेरी राधा रानी, सुनो है‌! मेरी राधा रानी,तुम बिन मेरा नही कोई साथी।मौसम चाहे कैसा भी हो,सभी प्राकृतिक समय कामैं ही कर्ताधर्ता।सावन भादो न ही सही,अभी पोष माह का जोर-सहना होगा।हम तुम मिलकर समस्त,जग वासीयों का शिशिर सेबचाव करना होगा।सभी प्राणी चर अचर, मानवएवं प्रकृति का रक्षण करना होगा।मैं ही जगतपिता हूं,सर्व ब्रम्हांड…

  • चुनाव आइल बा | Chunav Par Bhojpuri Geet

    चुनाव आइल बा ( Chunav aail ba )  आइल चुनाव बा… नेता घुमेलें, भर भर के गड़िया हो.. भर भर के गड़िया! सांझ सबेरे दुपहरिया!! नेता जी, नेता जी आवेले, हमके लुभावेलें। कह कह के बतिया हो, दीहें रोजगार आउर करीहें विकास हो। पूरा हो जाइ अबकी सभन के आस हो, लाचारी भटकी अब कबो#ना…

  • एक प्रेम कविता | Prem ki poem

    एक प्रेम कविता ( Ek prem kavita )    जब जब साथ तुम्हारा मिले यह ह्रदय मेरा प्रेम से खिले, फूलों से महक जाए हर खुशी भावनाओं में जैसे ये मन वहे ।। मैं एक प्रेम कविता बन जाऊं तू लिखे मुझे अपनी चाहत से , खाली समय में बस सोचे मुझे, तेरी ही एक…

  • Kavita Aaj ka Samachar | आज का समाचार

    आज का समाचार ( Aaj Ka Samachar )   कोरोना इस बार पार कर गया लाख एक और पंद्रह हजार रहें सतर्क करें न कुतर्क यह महामारी है सारे रोगों पर भारी है यमराज से इसकी यारी है धरी रह गई सारी तैयारी है टीके पर टिकी उम्मीद है अब सारी लगवाने की अब बारी…

  • फूल | Phool kavita

     फूल ( Phool kavita )   –> ये फूलों का संसार, ये फूलों का संसार || 1.फूलों का संसार बेहद रंगीन, सुंदर सुगंधित रहता है | फूलों के साथ जीना सीखो, हर फूल कुछ तो कहता है | लाल-गुलाबी-सफेद-जामुनी, कुछ सतरंगी होते हैं | कुछ तो होते बड़े सुनहरे, कुछ छोटे-छोटे होते हैं | –>…

  • मन का लड्डू | Man ka Laddu

    मन का लड्डू ( Man ka Laddu )    जाने कितने स्वप्न संजोए, मन का ताना बाना बुन। मन में लड्डू फूट रहे थे, जीवन में खुशियों को चुन। मन में मोतीराम बने हम, मन ही मन इठलाते थे। मन के लड्डू फीके ना हो, भावन ख्वाब सजाते थे। मन ही मन में ठान लिया,…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *