Kavita Jeevan Paheli

जीवन पहेली समान | Kavita Jeevan Paheli

जीवन पहेली समान

( Jeevan paheli saman ) 

 

ऐसा है हमारा यह जीवन का सफ़र,
चलते ही रहते चाहें कैसी यह डगर।
ख़ुद के घर में अतिथि बनकर जाते,
गांव शहर अथवा वह हो फिर नगर।।

गांवो की गलियां और हरे-भरे खेत,
पूछती है हमसे यह दीवारें और रेत।
कौन हो भाई और कहा से हो आए,
विधाता ने हमारा ऐसा लिखा-लेख।।

सारी ज़िंदगी अनजाने बनकर रहते,
अडौसी- पड़ौसी भी हमें भूल जाते।
किताबों तक ही रह जाती यह बातें,
अनजान राहें और अनजान ये रातें।।

बन गया है जीवन पहेली के समान,
फ़ौज की यह नौकरी हम है जवान।
आज स्वयं ही स्वयं से हम परेशान,
हम है हेरान और हर-पल अनजान।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

 

 

Similar Posts

  • राह-ए-इश्क | Poem Rah-E-Ishq

    राह-ए-इश्क ( Rah-E-Ishq )    उसकी पलकों के ओट से हया टपकती है, फिर भी देखो वो मौज-ए-बहार रखती है। दाना चुगने वाले उड़ते रहते हैं परिन्दे, क्या करे वो बेचारी तीर-कमान रखती है। शाही घरानों से नहीं हैं ताल्लुकात उसके, आसमां कीे छोड़, जमीं भी महकती है। दोष उसका नहीं, ये दोष है जवानी…

  • मजदूर पर कविता | Mazdoor

    मजदूर पर कविता ( Mazddor par kavita )   दोजून निवाला सही से नसीब ना हुआ मेरे हाथो आज तेरा सुंदर महल बन गया अपना तो झोपड़े में गुजारा हो गया कभी ठंड मे ठीठुर कर मैं सो गया कभी बारिश में भीग कांपता रह गया, कभी पसीने से लथपथ हो गरम थपेड़े सह गया…

  • मुंशी प्रेमचंद | Munshi Premchand par Kavita

    मुंशी प्रेमचंद! ( Munshi Premchand )  !! शत -शत नमन !! ( 1) मुंशी प्रेमचंद को कभी न भुलाया जाएगा उन्हें पाठ्यक्रम में हमेशा पढ़ाया जाएगा। सन अट्ठारह सौ अस्सी,लमहीं में जन्में थे सज़दा उस भूमि का हमेशा किया जाएगा। त्याग,तेज और लेखनी के थे वो बहुत धनी उनके संकल्पों को सदा दोहराया जाएगा। आजादी…

  • मन्नत | Mannat

    मन्नत ( Mannat )   रूपसी हो तुम्हीं मेरी प्रेयसी हो ग़ज़ल हो मेरी तुम्हीं शायरी हो बहार हो तुम ही तन्हाई भी हो जीवन की मेरे शहनाई भी तुम्ही दो गज ज़मीन हो मेरी तुम ही तुम ही फलक की रोशनी भी कल्पना हो मेरे जज़्बातों की तुम ही नर्म चादर हो खुशियों की…

  • आओ रोएँ

    आओ रोएँ ०जिसको खोया उसे याद कर बिलखें कलपें नयन भिगोएँआओ रोएँ०जो न खो गए उनको भूलेंखुशी दफ़्न कर, मातम वर लेंनंदन वन की जमीं बेचकरझट मसान में बसने घर लेंसुख-सपनों में आग लगाकरदुख-दर्दों के बीजे बोएँआओ रोएँ०पक्ष-विपक्ष नयन बन जाएँभूले से मत हाथ बँटाएँसाथ न चलकर टाँग अड़ाएँफूटी आँख न साथी भाएँनहीं चैन से…

  • दिवाली बधाई हो बधाई | Hindi Diwali Kavita

    दिवाली : बधाई हो बधाई   बधाई हो बधाई, दिवाली की शुभ घड़ी आई। बधाई हो बधाई, मेरे घर आंगन खुशियां लाई। बधाई हो…।।1।। फूलों की माला लेकर, नवरंग की रंगोली बनाई। फूलों से सज गए घर, लड्डू और मिठाई खाई। बधाई हो…।।2।। प्रकाश का यह त्यौहार, खुशियों की सौगात है आई। शुभ लाभ का…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *