कागज की कश्ती

Kavita Kagaz ki Kashti | कागज की कश्ती

कागज की कश्ती

( Kagaz ki kashti )

 

कागज की कश्ती होती
नन्हे  हाथों  में  पतवार
कौन दिशा में जाना हमको
जाने वो करतार

आस्था विश्वास मन में
जाना  है  उस  पार
बालपन का भोलापन
क्या जाने संसार

 

भाव भरी उमंगे बहती
नन्हे  बाल  हृदय  में
चंचल मन हिलोरे लेता
बालक के तन मन में

 

एक कागज की कश्ती से
वो  घूम  रहा  संसार
जग  रखवाला  जाने
नौका कैसे होगी पार

 

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

Kavita | गुनाह

 

 

 

Similar Posts

  • सुनो..| Romantic Poetry In Hindi

    सुनो.. ( Suno )   सुनो… तुम एक बार दो कदम घर से निकल कर देखो तो जरा चार क़दम चलते ही मैं उसी चौराहे पर खड़ा इंतजार कर रहा होऊंगा तुम्हारे आने का….   उस चौराहे से चुन लेना कोई भी एक रास्ता और चल पड़ना उस रास्ते पर जो मुझ तक ले आएगा…….

  • जीवन-भाग-2

    जीवन-भाग-2 हारना कब जितनाकब मौन रखना कबबोलना कब संतुलितहोंना कब विनम्रतापूर्वकपेश आना आदि – आदितब कहि जाकर हमइस जीवन रूपी नोकाको पार् पहुँचाने कीकोशिश कर सकते हैअतः हमनें आवेश मेंअपने आप को समनही रखा और अनियंत्रितहोकर बिना सोचें आक्रमकहोकर कुछ गलत सब्दोंका प्रयोग कर दिया तोइस जीवन रूपी नोका कोटूटने से वह डूबने से कोईभी…

  • ज़िन्दगी मुश्किल तो है

    ज़िन्दगी मुश्किल तो है ज़िन्दगी, मुश्किल तो है ।पर मुश्किल का ,कोई हल भी तो है ।सफ़र है बहुत लम्बा,पर कहीं मंज़िल तो है ।विघ्नों से ना डरा कर,बेख़ौफ़ सामना कर ।कर लेगा पार नौका,ना छोड़ना तू मौका ।हर मुश्किल दूर होगी,फिर सुख की सुबह होगी ।हां ज़िन्दगी कठिन है,पर ऐसा थोड़े दिन है ।यह…

  • मैं | Main

    मैं ( Main )    टूटे हुए दिल की दास्तान हूं मैं उजड़े हुए चमन का बागबान हूं मैं खिले तो फुल मगर , सब बिखर गए खड़ा पतझड़ सा ,नादान रह गया हूं मैं चले तो थे सांस मिलकर कई लोग रह गया तन्हा छूटा हुआ कारवां हूं मैं बट गई मंजिले भी उनकी…

  • यादें | Kavita

    यादें ( Yaaden ) जाती है तो जाने दों,यह कह नही पाया। नयनों के बाँध तोड़ के, मैं रो नही पाया। वर्षो गुजर गए मगर, तू याद है मुझको, मै भूल गया तुमको, ये कह नही पाया।   दिल का गुबार निकला तो,शब्दों में जड दिया। तुम जैसी थी इस दिल में तुझे,वैसा गढ़ दिया।…

  • खुद भी हिंदी बोलिये | 14 September Hindi diwas par kavita

    खुद भी हिंदी बोलिये ( Khud bhi hindi boliye )   खुद भी हिंदी बोलिये, औरों को दो ज्ञान। हिंदी में ही है छिपा, अपना हिंदुस्थान।।   चमत्कार हर शब्द में, शब्द शब्द आनंद। विस्तृत है साहित्य भी, दोहा रोला छंद।।   सब भाषा का सार है, सबका ही आधार। माँ हिंदी की वंदना, सुधि…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *