Kavita Kala Sanskriti

कला संस्कृति | Kavita Kala Sanskriti

कला संस्कृति

( Kala Sanskriti )

मेरे तेरे होने का
कोई प्रणाम चाहिए।
कला और संस्कृति का
कोई आधार चाहिए।
बिना आधार के क्या
बचा पाएंगे संस्कृति को।
जो हमारे पूर्वजो की
बहुत बड़ी धरोहर है।।

कला का संस्कृति पर
बड़ा उपकार होता है।
संस्कृति के चलते ही
कला उदय होता है।
दोनों के मिलन से
समाज में सुधार होता है।
इसलिए तो भारत को
कला संस्कृति का देश कहते है।।

कलाकार अपनी संस्कृति का
पत्थरों पर चित्रण करता है।
जिसे दुनिया देखकर के
प्रसंन्सा कला संस्कृति की करता है।
और पूरे विश्व में देखो
भारत का नाम रोशन करता है।
और अपने देश के लोगों का
गौरव बढ़ता है।।

Sanjay Jain Bina

जय जिनेंद्र
संजय जैन “बीना” मुंबई

यह भी पढ़ें :-

एक हो गये हम | Ek Ho Gaye Hum

Similar Posts

  • पिता | Pita par kavita in Hindi

    पिता ( Pita )   वह तो नहीं है पर याद बहुत आती है आगे बढ़ो खुश रहो हर पल जियो यह मेरे कानों में आवाज आती है गूंजते है शब्द उनके पापा जैसे पास खड़े पलक बंद करूं तो छवि मुस्कुराती है कितने दिन हो गए बरसो ही गुजर गए आज भी मुझे मेरे…

  • मित्र | Mitra par kavita

    मित्र ( Mitra )   अर्पण दर्पण और समर्पण मित्र तेरी यह पहचाने है l दुख में भय में और सुखों में हाथ मेरा वह थामें हैl वादों, रिश्तो से और नातो से ऊंचे उसके पैमाने हैंl गलत सही जो मुंह पर कह जाए दोस्त वही सुहाने हैंl ताकत साहस और ढाढस, में मित्र ही…

  • अजीब रंग में बहार गुजरी | Bahar

    अजीब रंग में बहार गुजरी ( Ajeeb rang mein bahar gujri )    अजीब रंग में अब के बहार गुजरी। आशाएं ले डूबी साल बेकार गुजरी। मौसम भी रहा मौन हवाएं थम सी गई। हमसे पूछे कौन फिजाएं खिल ना रही। देख कर भी अंजान क्या जमाना हुआ। टूटे दिलों का आज नया फसाना हुआ।…

  • वसुधैव कुटुंबकम् | Vasudhaiva kutumbakam

    वसुधैव कुटुंबकम् ( Vasudhaiva kutumbakam )    वसुधैव कुटुंबकम् से, दुनिया का आर्थिक श्रृंगार जी 20 अप्रतिम मेजबानी, भारत वर्ष अहो भाग्य । अतिथि देवो भव सत्कार, आनंद अथाह हिंद गणराज्य । सर्व विकासशील अर्थव्यवस्था , भव्य स्वप्न अब साकार । वसुधैव कुटुंबकम् से, दुनिया का आर्थिक श्रृंगार ।। वर्तमान वैश्विक चुनौतियों पर , गहन…

  • अंतिम बार मिलने आया बेटा वृद्धाश्रम | Milne Aaya Beta

    अंतिम बार मिलने आया बेटा वृद्धाश्रम ( Antim baar milne aaya beta vraddhashram )    अंतिम बार मिलने आया बेटा वृद्धाश्रम में यारों अपनी मां का कंगन चुराने के लिए बेच चुका है जमीन गहने घर के अब वो सारे घड़ियाली आंसू आज मां को दिखाने के लिए लाखों कमाया है जो धन बेईमानी का…

  • भ्रम | Bhram

    भ्रम ( Bhram )   जो गति तेरी वो गति मेरी,जीवन भ्रम की छाया है। नश्वर जग ये मिट जाएगा, नश्वर ही यह काया है। धन दौलत का मोह ना करना, कर्म ही देखा जाएगा, हरि वन्दन कर राम रमो मन,बाकी सब तो माया है। यौवन पा कर इतराता हैं, बालक मन से भोला है।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *