Kavita kuch tum badlo kuchh ham badle

कुछ तुम बदलो कुछ हम बदलें | Kavita kuch tum badlo kuchh ham badle

कुछ तुम बदलो कुछ हम बदलें

( Kuch tum badlo kuchh ham badle )

 

परिवेश हो गया कैसा क्या चलन चल आया है
बदलावों की बयार चली ये नया जमाना आया है

 

कुछ तुम बदलो कुछ हम बदले दुनिया बदल रही
छोड़ो बीती बातें अबतो देखो नई कहानी बन रही

 

नए दौर में नए तराने गीत नए अल्फाज नये
उर उमड़ते भावों के संग दिलों के अंदाज नये

 

कुछ तुम बदलो कुछ हम बदले करें कुछ काम नये
आओ साथ मिलकर चल दे रोशन कर दे नाम नए

 

अपनापन अनमोल बांट दे प्रेम सुधारस ले प्यारा
मुस्कानों के मोती सबको हम बहा दे नेह धारा

 

कुछ तुम बदलो कुछ हम बदलें बहती हुई बयार में
सबके दिल में जगह बना ले शुभ कर्मों से प्यार से

 

नई चेतना नई उमंगे हम परचम नया लहराएंगे
जीवन पथ की नव राहों में कीर्तिमान गढ़ जाएंगे

 

कुछ तुम बदलो कुछ हम बदले जीवन के सफर में
कुछ नया करके दिखला दे खुशियां बरसे शहर में

 ?

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

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