Kavita Maa Jaisi Didi

माँ जैसी दीदी | Kavita Maa Jaisi Didi

माँ जैसी दीदी

( Maa Jaisi Didi )

मांँ जैसी मेरी दीदी
मेरी दीदी प्यारी है
सबसे लाड दुलारी है
बहन की प्यारी दीदी।
मम्मी पापा की बिटिया रानी है।

माँ जैसी मेरी दीदी सबसे प्यारी
वह खुद भी पढ़ती मुझे पढ़ाती
दुनिया का अद्भुत ज्ञान बताती
विज्ञान व गणित मुझे सिखाती

माँ जैसी मेरी दीदी सबसे प्यारी
सबसे न्यारी करते हम नादानी है
पर वो सबसे सयानी है
डांट से मुझे बचाती है
हरदम प्यार लुटाती है

माँ जैसी मेरी दीदी सबसे प्यारी
बडे पेड़ की छाया सी
लहराते माँ के आँचल सी
शीतल मंद हवा जैसी
हरदममेरे साथ खड़ी मेरी
दीदी माँ जैसी।

मिहुं अग्रवाल
उम्र 13 वर्ष
नागपूर महाराष्ट्र

यह भी पढ़ें:-

सुन रही हो माँ | Sunn Rahi ho Maa

 

Similar Posts

  • दिल की आवाज | Poem dil ki awaz

    दिल की आवाज ( Dil ki awaz )    मेरा दिल मुझे ही बार-बार आवाज दे खुद को तुम खुद के ही उमंग से नवाज ले। कल के कई है आईनें, आज का रख तु मायने। डर से भरी ज़िन्दगी निडर बन के तु निकल तेरे जैसे बदन बहुत । लेकिन अलग अंदाज दे खुद…

  • मानव एक दूत है | Manav par Kavita

    मानव एक दूत है ( Manav ek doot hai )    रचकर भेजा है इस धरती पर मानव एक दूत है। नीली छतरी वाला बैठा उसकी माया अद्भुत है। वो डोर हिलाता सबकी सांसो की सरगम सुनता। बाजीगर के खेल निराले ताना-बाना सब बुनता। मानव को माध्यम बनाया धर्म-कर्म सब काज करें। दो हाथों से…

  • तुम मत रोना प्रिय | Tum mat Rona Priya

    तुम मत रोना प्रिय ( Tum mat rona priya )   तुम मत रोना प्रिय मेरे, यह तेरा काम नही है। जिस संग मन ये लागा, मेरा घनश्याम वही है।।   जो राधा का है मोहन, मीरा का नटवर नागर। वो प्रेम रसिक इस जग का, मन मेरा छलकत गागर।।   वो एक पुरूष सृष्टि…

  • Hindi Poetry On Life -जिंदगी कटी पतंग है

    जिंदगी कटी पतंग है ( Jindagi Kati Patang Hai )     जिंदगी कटी पतंग है, कठिनाइयों से तंग है!! छोर का पता नहीं कुछ डोर का पता नहीं जाएगी किधर किसी ओर का पता नहीं पता नहीं दूर कब , कब अपने संग है …   जिंदगी कटी पतंग है … कभी पास में…

  • आडंबर | Adambar

    आडंबर ( Adambar )    पुकारता वह रह गया भाई कोई बचा लो मुझे, भीड़ व्यस्त थी बहुत किन्तु वीडियो बनाने में! ठंड में बेहद ठिठुर रहे थे बेतहाशा गरीब, लोग थे मशगूल फिर भी चादरें चढ़ाने में! मर गया भूख से अखिर तड़प तड़प कर, फेंक रहे थे बचा हुआ खाना कूड़ेदान में! खाली…

  • मेरे हमसफर | Mere Humsafar

    मेरे हमसफर ( Mere humsafar )   पुष्पक्रम से भरी पगडंडी जो कि– रंगीन फुलवारी से सजी जिसकी भीनी-भीनी महक पूरे वातायन में हवा में तैरती है। वहीं उन पर अनगिनत तितलियाँ मंडराती हुई अहसास कराती तुम्हारे अपने होने का। जहाँ तक देखती हूँ उन्हें कैद कर लेना चाहती हूँ इन रंगीन खुशबू को भी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *