मतदान महोत्सव | Kavita Matdan Mahotsav

मतदान महोत्सव

( Matdan Mahotsav )

 

लोकतंत्र का महान महोत्सव मतदान करना
शक्ति भक्ति महान महोत्सव मतदान करना

राष्ट्र भक्त का कर्त्तव्य मतदान करें
देश हित्त में मिलजुल मतदान करें

राजतंत्र में राज घरानों की परम्परा
प्रजातंत्र में मतदान करने की परम्परा

अपने राजा का ख़ुद चयन करो
मत में शक्ति समाई चयन करो

पांच साल की होती समय सीमा
बदल देना बुरा हो समय सीमा

जनता का दुख दर्द नहीं जाने
उल्ट फेर कर दो नहीं माने

अब दौर नहीं रानी जन्मे राजा
मतदान से मिलता नया नवेला राजा

‘कागा’ करो बेख़ोफ़ मतदान बन यारो
बिना लोभ लालच मोह बन यारो

कवि साहित्यकार: तरूण राय कागा

पूर्व विधायक

यह भी पढ़ें :-

महावीर जयंती | Kavita Mahavir Jayanti

Similar Posts

  • गोरी नखराली | फागुनी धमाल

    गोरी नखराली ( Gori nakhrali )   गोरी नखराली नथली थारी हंस बतलावे ए गोरी नखराली-नखराली गोरी   गोरा गोरा गाल गुलाबी थारा नैणां तीर शराबी फागण आयो मस्त महीनों ल्यायो गुलाल गुलाबी थारी तिरछी तिरछी चाल रसीला होठ करै बदहाल चाल थोड़ी धीमै चालो ए गिगनार गोरी नखराली नखराली गोरी   फागण म गोरी…

  • Kavita | ये क्या हो रहा है

    ये क्या हो रहा है  ( Ye Kya Ho Raha Hai )     घर से बाहर निकल कर देखिए- मुल्क़ में ये क्या हो रहा है, सबका पेट भरने वाला आजकल सड़कों पर भूखे पेट सो रहा है । मुल्क़ में ये…   खेतों की ख़ामोशियों में काट दी जिसने अपनी उम्र सारी, बुढ़ापे…

  • बुलंदी का तिरंगा चाॅंद पर लहराया | Bulandi ka Tiranga Chand par Lahraya

    बुलंदी का तिरंगा चाॅंद पर लहराया ( Bulandi ka tiranga chand par lahraya )    बहुत-बहुत बधाई हो आपको प्यारे-प्यारे हिंदुस्तान, सफलतापूर्वक अपनी-मंजिल पहुॅंचा दिए चंद्रयान। बोल रहा है सम्पूर्ण विश्व आज आप को यह महान, बहुत सारे रहस्य बताएगा अब आपको ये प्रज्ञान।। जिस दक्षिण ध्रुव पर जाने में पूरा विश्व घबराता था, बेहद…

  • महंगाई | Kavita mehngai

    महंगाई ( Mehngai )   महंगाई ने पांव पसारे कमर तोड़ दी जनता की सुरसा सी विस्तार कर रही बढ़ रही दानवता सी   आटा दाल आसमान छूते भुगत रहे तंगहाली को निर्धन का रखवाला राम जो सह रहे बदहाली को   दो जून की रोटी को भागदौड़ भारी-भरकम होती स्वप्न सलोने सारे धराशाई मजबूरियां…

  • बोलना बेमानी हो जाए

    बोलना बेमानी हो जाए बोलो!कुछ तो बोलोबोलना बेमानी हो जाएइससे पहले लब खोलो पूछोअरे भई पूछोपूछने मे जाता ही क्या हैपूछना जवाब हो जाएइससे पहले पूछ लो चलोचाहे कितनी पीड़ा होचलना बस कदमताल न हो जाएवैसे भीचलना जीवन की निशानी हैरुकना मौत की लिखोचाहे कुछ भीकिसी के वास्तेचाहे कितना खराब हो मौसमलिखना बस नारा न…

  • भुखमरी की पीर | Bhukhmari par Kavita

    भुखमरी की पीर ( Bhukhmari ki peer )    भूखे नंगे लाचारों की नित पीर सुनाया करता हूं। मैं सत्ता के गलियारों में अलख जगाया करता हूं। जठराग्नि आग बन जाए भूखमरी हो सड़कों पे। मैं कलम की नोक से आवाज उठाया करता हूं। बेबस मासूम पीड़ा की तकदीर सुनाया करता हूं। कचरों में भोजन…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *