mausam ki maar

मौसम की मार | kavita mausam ki maar

मौसम की मार

( Mausam ki maar )

 

शीतलहर ढ़ाहत कहर दिखाई न देता डगर है,
पग-पग जोखिम भरा मुश्किल हुआ सफ़र है,

 

 

सनसन चलती हवा ठंडक से ठिठुरता मानव,
कौन किसकी बात सुने सबही हुआ सफ़र है।

 

कहीं पड़ते बर्फ के फाहे कहीं मूशलाधार वर्षा,
चहुँओर से घिरता जीवन जीना हुआ दुभर है।

 

एक आग है भूख की उसपर मौसम की मार,
प्रकृत किसी की न सुने सबही हुआ लचर है।

 

☘️

लेखक: त्रिवेणी कुशवाहा “त्रिवेणी”
खड्डा – कुशीनगर

यह भी पढ़ें :-

समय का कालखंड | Kavita Samay ka Kalkhand

Similar Posts

  • व्रीड़ा | Kavita Vrida

    व्रीड़ा (  Vrida ) खोया स्वत्व दिवा ने अपना, अंतरतम पीड़ा जागी l घूँघट नैन समाए तब ही, धड़कन में व्रीड़ा जागी ll अधर कपोल अबीर भरे से, सस्मित हास लुटाती सी, सतरंगी सी चूनर ओढ़े, द्वन्द विरोध मिटाती सी, थाम हाथ साजन के कर में सकुचाती अलबेली सी, ठिठक सिहर जब पाँव बढ़ा तो,…

  • कागा की कविताएं | Kaga Hindi Poetry

    राखड़ी पूनम पर्व भाई बहिन का पावन पर्व राखड़ी पूनम बहिन भाई का गोर्व गर्व राखड़ी पूनम सावन पूर्ण-मास का अंतिम पखवाड़ा पवित्र बहिन बांधे राखड़ी भाई कलाई पावन पवित्र चूनडी़ की चाहत छोड़ मांगना एक वचन मात पिता की सेवा मांगना एक वचन बहिना आप करना सास ससुर की सेवा जीवन होगा सफल सुखी…

  • ठहराव |Thaharaav

    ठहराव ( Thaharaav )   मुझे तो चलना ही होगा आप चले या ना चलें आपके खातिर मैं रुक नहीं सकता हालांकि आपको छोड़ना भी नहीं चाहता सफर दूर का है फासला बहुत है भरोसा नहीं कल के फजर का मगरिब से पहले पहुंचना है मुकाम तक चलना है मुझे इसी जिद्दी से भरम पालकर…

  • हिन्दी की बिंदी | Kavita Hindi ki Bindi

    हिन्दी की बिंदी ( Hindi ki Bindi ) अंग्रेजी के लेटर भी रहते हैं साइलेंट। हिन्दी की बिंदी भी बजा देती है बैंड। एक बिंदी भी दिखाती है इतना कमाल। शब्द के अर्थ में मचा देती है धमाल। आसमां को उतार कर धरती में ला सकती है। धरती को उठाकर आसमां में पहुंचा सकती है।…

  • मायके में | Kavita Mayke Mein

    मायके में ( Mayke Mein ) मौसमों का आना जाना है मायके में सावन से रिश्ता पुराना है मायके से हरियाली तीज पर मायके आती हैं बेटियां सावन के झूलों में झुलाई जाती हैं बेटियां लाड़ जो पीछे छोड़ गई थी आती है वापिस पाने को मां पापा भी जतन करते, बेटी के नाज़ उठाने…

  • हिंदी को अपनाओ | Hindi ko Apnao

    हिंदी को अपनाओ ( Hindi ko Apnao ) बच्चों हिंदी को अपनाओ,हिंदी का तुम मान बढ़ाओ,हिंदी हिंदुस्तान की भाषा,हिंदुस्तानी तुम कहलाओ, लिख लो हिंदी, पढ़ लो हिंदी,हिंदी बड़ी अलबेली है,बोलो हिंदी, गा लो हिंदी,हिंदी रंग-रंगीली है,हिंदी को व्यवहार मे लाओ,हिंदी का परचम फहराओ,बच्चों हिंदी को अपनाओ,हिंदी का तुम मान बढ़ाओ, खेलो-कूदो हिंदी के संग,हिंदी सखा-सहेली…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *