Har khushi se garibe Aazam
Har khushi se garibe Aazam

हर ख़ुशी से ग़रीब ए आज़म

( Har khushi se garibe Aazam )

 

 

हर ख़ुशी से ग़रीब ए आज़म!
बदलेगा कब नसीब ए आज़म

 

इसलिए शहर छोड़ आया हूँ
थे यहां सब  रकीब ए आज़म

 

हाले दिल किसको सुनाऊं मैं
की न कोई क़रीब ए आज़म

 

कैसे उसके ख़िलाफ़ बोलूं मैं
आदमी वो नजीब ए आज़म

 

छोड़ दे दुश्मनी की बातें अब
बन जाये  तू हबीब ए आज़म

 

हर तरफ़ है नमी निगाहों में
कैसा मौसम अजीब ए आज़म

 

प्यार का मिलता फूल जो मुझको
हूँ नहीं  ख़ुशनसीब  ए  आज़म

 

❣️

शायर: आज़म नैय्यर

(सहारनपुर )

यह भी पढ़ें : –

सांसों में खुशबू यार की | Ghazal

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here