kavita mere shri Ram

मेरे श्री राम | kavita mere shri Ram

मेरे श्री राम

( Mere Shri Ram )

 

त्याग तपस्या मर्यादा के प्रति पालक मेरे श्रीराम
जन जन आराध्य हमारे सृष्टि संचालक प्रभु राम

 

हर लेते है पीर जगत की दीनबंधु दयानिधि राम
मंझधार में अटकी नैया पार लगाते मेरे प्रभु राम

 

दुष्टों का संहार करें प्रभु सकल चराचर के स्वामी
घट घट में श्रीराम विराजे श्री रामचंद्र अंतर्यामी

 

साधु संत महा मुनियों के रक्षक राम धनुर्धारी
रामनाम में शक्ति समाई तिर जाते पत्थर भारी

 

दशरथ नंदन राम प्यारे कौशल्या के राज दुलारे
हनुमान से भक्त तिहारे पीर हरो हे राम हमारे

 

करुणा के सागर है राघव सारे जग के करतार
परम प्रभु परमेश्वर मेरे राम प्रभु है लखदातार

 

मेरे राम प्रभु तारनहारे दीनबंधु दुखियों के सहारे
सच्चे मन से जो पुकारे हो जाते सब वारे न्यारे

 

प्रेम सिंधु उमड़ा आता राम राम मन राम समाता
ध्यान लगाकर जो गाता सब मनोरथ जग पाता

 

धरती अंबर वायु में भी कण कण में बसते हैं राम
राम राम श्री राम पुकारो राम राम बस राम ही राम

 

 ?

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

तपन | Kavita Tapan

Similar Posts

  • स्वामी- विवेकानंद | Swami Vivekananda Par kavita

    स्वामी- विवेकानंद ( Swami Vivekananda ) ( 3 )  कोलकाता के कुलीन कयस्थ परिवार में पुत्र उत्पन्न हुआ। पिता विश्वनाथ दत्त,माता भुनेश्वरी देवी जग में महान थी, जिसके घर में स्वयं विश्व धर्म मार्गदर्शन गुरू प्रकट हुआ।। देशभक्त सन्यासी बनकर मातृभूमि का नमन करू जो, सारे जीवों में स्वयं परमात्मा का अस्तित्व है वंदन करे…

  • आम | Aam

    आम ( Aam ) आम सब फलों का राजा मीठा रसीला फलों का राजा जून में लग जाता जोरदार खट्टा मीठा फलों का राजा नाम दाम रंग रूप अनेक स्वाद सुंदर फलों का राजा दशहरी हापूज़ तोता पुरी ताज़ा लंगड़ा केस़र फलों का राजा मिश्री से मीठा मधुर ज़ायक़ा कच्चा पक्का फलों का राजा कच्चे…

  • क्या शैतान सच में होते हैं

    क्या शैतान सच में होते हैं क्या सच में,होते हैं शैतान ?या ये है केवल,हमारा अनुमान ।हां वाकई,होते हैं शैतान ।जब हम करते हैं,कोई बुरा काम ।या फ़िर करते हैं,बड़ों का अपमान ।तब हमारे भीतर ही,प्रविष्ट हो जाते हैं ;ये दुष्ट शैतान ।जब हम, भूल जाते हैं ,सही ग़लत की पहचान ।तभी हमें उकसाते हैं…

  • मेरा जिगर तिरंगा | Mera Jigar Tiranga

    मेरा जिगर तिरंगा ! ( Mera jigar tiranga ) मेरा अमर तिरंगा है, मेरा जिगर तिरंगा है। रग – रग में यही बसता, ऐसा ये तिरंगा है। मेरी आन तिरंगा है, मेरी शान तिरंगा है, कोई दुश्मन देखे इसे, दहलाता तिरंगा है। तेरा भी तिरंगा है, मेरा भी तिरंगा है, तू नजर उठा के देख,…

  • मां ब्रह्मचारिणी | Maa Brahmacharini

    मां ब्रह्मचारिणी ( Maa Brahmacharini )  ( 2 ) दूजा माँ का रूप है, ब्रह्मचारिणी जान। हस्त कमण्डलु घोर तप, निरत सघन जप- ध्यान।। ब्रह्मचारिणी मातु की, करें वंदना भक्त। पूज रहे माँ के चरण, लगा आलता रक्त।। कष्टों की बरसात में, भीग रही हर बार। माँ सिर पर छाया करो, आऊँ जब भी द्वार।।…

  • वसन्त – दोहायन | Basant poem

    “वसन्त – दोहायन” ( Basant dohayan )   मेटे ऋतु सन्देश ने, सभी कठिन सन्त्रास! हुई प्रतीक्षापूर्ण और, सफल हुए आयास !!   हैअब पुष्पित औ’फलित,जन्मजन्म की प्रीत! पास अवनिके आगया, फिर वसन्त मनमीत !!   आया अब गुदगुदाता, लिए विमल अनुराग! गुन गुन करते भ्रमरसा, खोजक पुष्पपराग !!   धरा वसंती हो गई, अनुभव…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *