Kavita pyaar mein takrar

प्यार में तकरार | Kavita pyaar mein takrar

प्यार में तकरार

( Pyaar mein takrar )

 

तेरे प्यार में पागल फिरता, सारी दुनिया घूमता।
नाम  तेरा  ले  लेकर मैं, हर डाली पत्ता चूमता।

 

प्यार तेरा पाकर खिला, चमन मेरे घरबार का।
दिल से दिल के तार जुड़े, नाम कहां तकरार का।

 

तेरे सारे नाजो नखरे, हर अदा मनभावन लगती।
चार चांद चमक उठते, श्रृंगार कर जब तू सजती।

 

तुम ही हो सुंदर संसार, खिलता गुलशन गुलजार।
करती हो मुझसे तकरार, बरसता नैनो से अंगार।

 

कहां गये बोल मधुर प्यारे, झरने बहते प्यार के।
दिल हो जाता हर्षित, तेरी पायल की झंकार से।

 

आ जाओ प्रियतम प्यारे, आ गया मधुमास भी।
होली का मौसम आया, लेकर प्रेम विश्वास भी।

 

बजने लगे तार दिलों के, मन में उमंगों की झंकार।
आकर गले मिलो हमारे, छोड़ो अब सारी तकरार।

   ?

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

गोरी नखराली | फागुनी धमाल

Similar Posts

  • पुरुष हो जाना | Kavita purush ho jana

    पुरुष हो जाना ( Purush ho jana )    पुरुष के लिए कहा आसान रहा ” पुरुष हो जाना ” सबको खुश रखना सब को समझ पाना सबको संभालना उसकी कोशिश रही, सब कुछ सरल बनाना हां पुरुष ही है ” खुशियों का खजाना ” ।। पुरुष के लिए कहा आसान रहा ” पुरुष हो…

  • योग विश्व को भारत की देन | Yoga par kavita

    योग विश्व को भारत की देन ( Yoga vishwa ko bharat ki den )   योगी ऋषि-मुनियों ने, जग को योग सिखाया। तपस्या के दम पर, योग शिक्षा दे गए।   अपना भारत देश, दुनिया में है विशेष। संसार को योग शिक्षा, योगी संत दे गए।   अनुलोम विलोम हो, प्राणायाम आसन हो। स्वस्थ तन…

  • उधम सिंह सरदार | Kavita Udham Singh Sardar

    उधम सिंह सरदार ( Udham Singh Sardar ) आन-बान थे देश की, उधम सिंह सरदार। सौरभ’ श्रद्धा सुमन रख, उन्हें नमन शत बार।। वैशाखी की क्रूरता, लिए रहे बेचैन। ओ डायर को मारकर, मिला हृदय को चैन।। बर्बरता को नोचकर, कर ओ डायर ढेर। लन्दन में दहाड़ उठा, भारत का ये शेर।। बच्चा-बच्चा अब बने,…

  • इन्हीं दिनों | Inhi Dino

    इन्हीं दिनों ( Inhi Dino ) अक्टूबर फिर गुज़रने को हैमेरे ज़ख़्म हरे करने को हैंपारिजात की बेलों परनीले फूल महक रहे थेउम्मीद की शाख़ों परआरज़ू के पंछी चहक रहे थे तुम ने इन्हीं दिनों दबे स्वर में कहाजा रहा हूँ सात समन्दर पारयदि हो सके तोतुम करना इन्तज़ारतुम्हें कैसे बताऊँउस लम्हे की कसकज़मीं पे…

  • किसानों की सुन ले सरकार!

    किसानों की सुन ले सरकार! ******* आए हैं चलकर दिल्ली तेरे द्वार, यूं न कर उनका तिरस्कार; उन्हीं की बदौलत पाते हम आहार। सर्द भरी रातों में सड़कों पर पड़े हैं, तेरी अत्याचारी जल तोप से लड़ रहे हैं। सड़कों के अवरोध हटा आगे बढ़ रहे हैं, शायद कोई इतिहास नया गढ़ रहे हैं। आखिर…

  • बिन बुलाए | Bin Bulaye

    बिन बुलाए ( Bin Bulaye ) बिन बुलाए आज तुम फिर कहां से आ गए हो। बंद पड़े सूने मकां की कुंडी खटखटा गए हो। मोगरे सी महका गई है तेरी यादों की खुशबू । छटपटा उठी जो दफन थी दिल में कोई जुस्तजू। पता नहीं अब क्या होगा आंख बाईं फड़का गये हो।। क्यों…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *