खो गया दिल कहीं आपको देखकर

खो गया दिल कहीं आपको देखकर

 

 

खो गया दिल कहीं आपको देखकर।

खुद   हैरान   हूँ  ये  असर  देखकर।।

 

ठहर  पाया  ना  बैरी  कभी  सामने ।

डर गया हौंसला वो जिगर देखकर ।।

 

रत्न सागर से वो ला न पाया  कभी ।

डर गया जो उमड़ती लहर देखकर।।

 

धूप  की  राह  में आज मज़दूर को ।

दिल परेशां  हुआ दर-बदर देखकर।।

 

थम न पाया कभी शायरी का सफ़र।

मुश्किलों  से  भरी ये डगर देखकर।।

 

अपनी मंज़िल कहाँ पायेगा तू “कुमार”।

रूक  गया  मुश्किलें तू अगर देखकर !

 

 

❣️

लेखक: Ⓜ मुनीश कुमार “कुमार”
(हिंदी लैक्चरर )
GSS School ढाठरथ
जींद (हरियाणा)

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