Khoobsurati ki Tareef par Kavita

खूबसूरत | Khoobsurati ki Tareef par Kavita

खूबसूरत

( Khoobsurat ) 

 

खूबसूरत नज़र आती हो,
अदाओं से भी लुभाती हो,
आती हो जब भी सामने
सच में कयामत ढाती हो।

माथे पर बिंदी सजाती हो,
आँखों में कजरा लगाती हो,
महकाती हो बालों में गजरा
सच में कयामत ढाती हो।

हाथों में मेहंदी रचाती हो,
चूड़ी कंगना खनकाती हो,
ओढ़ती हो जब तुम दुपट्टा
सच में कयामत ढाती हो।

मोतियों का हार सजाती हो,
पायल अपनी बजाती हो,
करते हैं घुँघरू छम छम
सच में कयामत ढाती हो।

नैनो के तीर चलाती हो,
घायल तुम कर जाती हो,
आती हो जब भी सामने
सच में कयामत ढाती हो।

 

कवि : सुमित मानधना ‘गौरव’

सूरत ( गुजरात )

यह भी पढ़ें :-

वाह रे टमाटर | Wah re Tamatar

 

Similar Posts

  • नामुमकिन है | Namumkin hai

    नामुमकिन है ( Namumkin hai )    काजल की कालिख हर ले काजल, नामुमकिन है। नफ़रत का नफ़रत से निकले हल, नामुमकिन है। हम जैसा बोएँगे, वैसा ही तो काटेंगे, दुष्कर्मों का निकले शुभ प्रतिफल, नामुमकिन है। दुख-दर्दों, संघर्षों के कटु अनुभव भी देगा, जीवन सुख उपजाएगा अविरल, नामुमकिन है। उनके आश्वासन का मित्रो कोई…

  • विश्व तंबाकू निषेध दिवस

    विश्व तंबाकू निषेध दिवस   बस एक कदम, खुशियों की ओर तंबाकू सर्वदा हानिकारक, तन मन धन हीनार्थ बिंदु । विचलित दशा दिशाएं, दूरी यथार्थ आनंद सिंधु । क्रोध वैमनस्य घृणा संग, हर पल नैराश्यता सराबोर । बस एक कदम, खुशियों की ओर ।। तंबाकू मिश्रित विविध पदार्थ, सर्वत्र सहज सुगम उपलब्ध । आरंभ शौक…

  • बंजारा के दस कविताएं

    1 प्रवाह ——- सोचता हूं कि दुनिया की सारी बारूद मिट्टी बन जाये और मैं मिट्टी के गमलों में बीज रोप दूं विष उगलती मशीनगनों को प्रेम की विरासत सौप दूं . पर जमीन का कोई टुकड़ा अब सुरक्षित नहीं लगता . कि मैं सूनी सरहद पे निहत्था खड़ा अपने चश्मे से, धूल -जमी मिट्टी…

  • बटवारे का ख़्याल | Batwara par kavita

    बटवारे का ख़्याल ( Batware ka khayal )    ना कोई रियासते है न ही ‌हाथी-घोड़े, बटवारा केवल है ये बर्तन थोड़े-थोड़े। बटवारे हुये जिनके अनेंको है किस्से, अब क्या समझाएं तुम हो पढ़ें लिखें।। बटवारे के लिए हुआ यह महाभारत, दिन में होता युद्ध शाम पूछते हालत। सभी परिवारों का आज यही है हाल,…

  • दशानन | Dashanan

    दशानन ( Dashanan )  ( 2)  जली थी दशानन की नगरी कभी कभी हुआ था वध रावण के तन का जला लो भले आज पुतले रावण के उसने चुन लिया है घर आपके मन का.. मर गया हो भले वह शरीर के रूप मे किंतु कर रहा रमन विभिन्न स्वरूप मे बसा ,हुआ खिल खिला…

  • समय का न करें दुरुपयोग

    समय का न करें दुरुपयोग   समय का ना करों मित्र मेरे दुरुपयोग मुश्किल से मुश्किल घड़ी आने का बन रहा है योग देखों, दिख रहा है महंगाई का प्रकोप झेलना पड़ रहा है भारी इनका रौद्र रूप योग समय का ना,,,,,,,,, भाग नहीं सकेंगे इनसे यह है बड़ा कठोर वियोग इसमें समाएं जा रहा…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *