Badal Poem

Badal Poem in Hindi | बादल

बादल

( Badal ) 

सांसों की हाला पिलाएगा बादल,
उजड़ी दुनिया बसाएगा बादल।
स्वागत करेगी प्यासी ये धरती,
प्रलय बाढ़ साथ में लाएगा बादल।

सूख गई है जो जीवन की डाली,
हरी- भरी धरा बनाएगा बादल।
अमराई जागेगी बागों में फिर से,
अधरों की प्यास बुझाएगा बादल।

पट जाएगी फिर ऋतुओं से धरती,
डालों पे झूला डलाएगा बादल।
चढ़ेगा नशा जड़ -चेतन के ऊपर,
भर-भरके प्याला पिलाएगा बादल।

कलियों की फूलों से भरेगा प्याला,
मखमली घासों पे सुलाएगा बादल।
रस से भर जाएँगी अंगूरी लतायें,
तपोवन को फिर सजायेगा बादल।

करेंगे प्रणय कलियों से भौंरे,
आँख – मिचौली सिखाएगा बादल।
संघर्ष करेगा, बढ़ेगा भी वही,
चढ़ी है जिसकी उतारेगा बादल।

खंडाला जाओ या अम्बाला जाओ,
बदन में लपट उठाएगा बादल।
महकती नहीं यूँ जीवन की क्यारी,
सोने के जैसा तापएगा बादल।

कौन निगल रहा हरियाली यहाँ,
उंगली पे उसको नचाएगा बादल।
झीलें हैं उसकी, नदिया हैं उसकी,
हँस -हँस के पानी पिलाएगा बादल।

बरसने का हुनर सबको आता नहीं,
ऐसा इल्म भी सिखाएगा बादल।
भरा पेट अपना, मैदान क्या मारा,
उसका जहर वो उतारेगा बादल।

पहले वाष्प बनना तुम भी सीखो,
स्वर्ग से अप्सरा उतारेगा बादल।
झूमेंगी बालें खेतों में एक दिन,
सबको अमृत पिलाएगा बादल।

रामकेश एम.यादव (रायल्टी प्राप्त कवि व लेखक),

मुंबई

यह भी पढ़ें :-

आशिक़ी | Aashiqui

Similar Posts

  • लोग | Kavita Log

    लोग ( Log )   टेढ़ा मेढ़ा कटाक्ष, लिखा फिर भी, समझें लोग, सीधा सीधा मर्म, लिखा ही लिखा, जरा न समझें लोग। वक्तव्यों मे अपने, सुलझे सुलझे, रहते लोग, मगर हकीकत मे, उलझे उलझे, रहते लोग, खातिरदारी खूब कराते, मेहमानी के, शौकीन लोग, खातिरदारी जरा न करते, मेजबानी से, डरते लोग, अपना समझें और…

  • ️️आओ गणेश जी️ | Aao Ganesh Ji

    ️ आओ गणेश जी  ( Aao Ganesh Ji )   –>आओ मेरे गणराजा………..|| 1.आओ मेरे महराज गजानन, स्वागत है अभिनन्दन है | ऋद्धि-सिद्धि को साथ मे लाना, उनका भी सत-बन्दन है | सालों से तुम अपने भक्तों के, दूर दुखों को करते हो | निर्बल और पीडित भक्तों की, पीडा को तुम हरते हो |…

  • Hindi Poetry On Life | Hindi Ghazal -यही जीवन है!

    यही जीवन है! ( Yahi Jeevan Hai ) ***** जीवन पथ में कभी कभी कुछ ऐसा होता है रोम रोम क्षण में पुलकित होता है। धूम धड़ाका पार्टी शार्टी गाजे बाजे संग बाराती प्रीतिभोज की होती तैयारी अधरो पर मुस्कान बिखर जाती चहुंओर खुशियां ही खुशियां नजर है आती। तो कभी एक पल में कर…

  • दीप | Deep

    दीप ( Deep )    न सही विश्वास मेरा, पूछ ले उस दीप से। जो रात सारी रहा जलता, साथ मेरे बन प्रतिबम्ब।। हाल सारा जायेगा कह, दीप वह जो बुझ गया। जगने का सबब मेरा, और जलने के मजा।। मांगतीं विश्वास का बल, देख ले इक नजर भर। बस वही लेकर मैं संबल, जलती…

  • सुमित मानधना ‘गौरव’ की कविताएं | Sumit Mandhana Poetry

    इस खत को कब से संभाल कर रखा था। आज आपका विश्व पत्र लेखन विषय मिलने के बाद यह खत आपके मंच पर साझा रहा हूँ .. हम सभी के चहेते, कवियों के प्रणेता और बहुत ही सुप्रसिद्ध कवि एवं एक्टर शैलेश लोढ़ा जी की बहुत ही फेमस कविता है, सच-सच बताओ ना यार मिस…

  • वह आदमी | Kavita Wah Aadmi

    वह आदमी ( Wah Aadmi )   वह आदमी दो कमरों के मकान में बड़ा खुश था कि अन्ना – आन्दोलन ने उसे राजनीति के कच्चे शीशे में जड़ा सपना दिखा दिया . वह आदमी सब पर आरोप मढ़ा हुआ जा बैठा महत्वाकांक्षा के औंधे शिखर पर . वह आदमी चुंकि आम आदमी था लोगों…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *