तिरलोकी को नाथ सांवरो

कृष्णा | Krishna par Kavita

कृष्णा

( Krishna )

कारावास में जन्म लिए
जो था उन्हीं का वंश
कर्मों का फल भोगने को
विवश था कृष्ण और कंश ।

बालापन में खूब खेलते
करते थे खूब शरारत
उम्र के साथ सीखाए करना
रासलीला और महाभारत ।

राधा के पीछे खूब भागते
वो था ना चरित्र हीन
अदृश्य होकर लाज बचाए
जब हो गई द्रोपदी दीन ।

गोपियों के साथ रास रचाते
करते थे माखन चोरी
शिशुपाल का सिर काट दिए
सौ गलती जब हो गई पूरी ।

कृष्ण से दोस्त मिलने आए
जब था अभाव खली
दानवीरता का घमंड चूर किए
पद के नीचे था बली ।

मधुर मीठी मुस्कान से
शक्तिहीन किए इन्द्र का वज्र
जरूरत पड़ी तो धारण कर लिए
बांसुरी से चक्र ।

राधा के लिए खूब रोए
व्याकुल था उनका मन
मृतकों से पट गई
महाभारत का रण ।

समय के अनुसार सीखाए जीना
जो खाते थे मां से मार
उत्साह हीन जब हुए अर्जुन
तो बताए जीवन का सार ।

रवीन्द्र कुमार रौशन “रवीन्द्रोम”
भवानीपुर, सिहेंश्वर, मधेपुरा , बिहार

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